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वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर को जियो की वजह से तगड़ा झटका लगा है। केवल जुलाई में ही दोनों कंपनियों के कुल 37 लाख कस्टमर्स उन्हें छोड़ चुके हैं।दोनो कंपनियां सब्सक्राइबर मार्केट शेयर कैप रूल्स का पालन करने में जी-जान से जुटी हुई हैं। ऐनालिस्ट्स ने बताया कि हाल के दिनों में मिले अहम क्लियरेंस के चलते दोनों के मर्जर प्रोसेस में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि जुलाई में दोनों कंपनियों के कुल कस्टमर्स की संख्या में 37 लाख की कमी आई है।

जुलाई में देश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल फोन सर्विस कंपनी वोडाफोन इंडिया के हाथ से लगभग 14 लाख सब्सक्राइबर्स निकल गए। इसके अलावा देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर आइडिया सेल्युलर के 23 लाख सब्सक्राइबर्स छूट गए। इसका पता सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के जुटाए डेटा से चला है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच के डायरेक्टर नितिन सोनी ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, 'वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर उन इलाकों में कम एवरेज रेवेन्यू देने वाले यूजर्स को छोड़ रही है, जहां उनका कुल सब्सक्राइबर मार्केट शेयर टेलिकॉम मर्जर ऐंड अक्वीजिशन की लिमिट से बहुत ज्यादा है।'

एंजेल ब्रोकिंग के टेलिकॉम ऐनालिस्ट मयूरेश जोशी ने सोनी से इत्तेफाक जताया है। जोशी ने कहा कि खासतौर पर कॉम्पिटिटिव मार्केट में यह काम आसानी से किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए कंपनियों को कुछ सर्कल में प्रमोशनल ऐक्टिविटीज में बड़े पैमाने पर निवेश के फैसले से परहेज करना होगा। सीओएआई के डेटा को ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, यूपी वेस्ट और वेस्ट बंगाल जैसे अहम बाजारों में वोडाफोन और आइडिया के सब्सक्राइबर्स की संख्या पिछले महीने खासी घटी है। यहां उन दोनों का कुल मार्केट शेयर क्रमश: 59%, 56%, 62%, 59%, 55% और 51% है जो मर्जर से बनने वाली कंपनी के लिए तय लिमिट से ज्यादा है।

लोकल मर्जर ऐंड अक्वीजिशन रूल्स के मुताबिक मर्जर से बनने वाली कंपनी का कंबाइंड सब्सक्राइबर मार्केट शेयर और रेवेन्यू मार्केट शेयर किसी भी सर्कल में 50 पर्सेंट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सीओएआई की तरफ से जारी जुलाई के सब्सक्राइबर डेटा के मुताबिक वोडाफोन और आइडिया के महाराष्ट्र में 4.43 लाख, हरियाणा में 2.45 लाख, मध्य प्रदेश में 2.9 लाख, वेस्ट यूपी में 1.56 लाख, वेस्ट बंगाल में 1.46 लाख और गुजरात में 76000 सब्सक्राइबर्स छूट गए। ऐनालिस्टों ने बताया कि इसका सबसे ज्यादा फायदा रिलायंस जियो को हुआ जबकि मार्केट लीडर भारती एयरटेल को थोड़ा बहुत लाभ हुआ।

इकनॉमिक टाइम्स ने इस बारे में डीटेल्स जानने के लिए वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर को ईमेल भेजी थी, जिनका जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं आया था। 24 जुलाई को दोनों के 23 अरब डॉलर के मर्जर प्लान को कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया की बिना शर्त मंजूरी और दो महीने पहले सेबी से सशर्त मंजूरी मिली थी।
मामले के जानकार सूत्र ने बताया कि जियो के लाइफटाइम फ्री वॉइस कॉल के साथ ही बेहद सस्ते डेटा ऑफर के चलते दोनों टेलिकॉम कंपनियों के हाथ से सब्सक्राइबर्स निकल रहे हैं। वोडाफोन और आइडिया ने पहले कहा था कि जियो की एंट्री से उनको बहुत नुकसान हुआ है।

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