Post Page Advertisement [Top]


शांत क्षेत्र को लेकर उच्च न्यायालय ने की सरकार की खिंचाई

 उच्च न्यायायलय में महाराष्ट्र सरकार ने बताया है कि महाराष्ट्र में इस समय कोई शांत क्षेत्र अधिसूचित नहीं है। यह जानकारी मिलने के बाद कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वह राज्य में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देने के लिए इतनी ज्यादा क्यों उतावली है|

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने मंगलवार को उच्च न्यायायलय के न्यायाधीश एएस ओक और रियाज छागला की पीठ को बताया कि वर्ष 2000 के शोरगुल प्रदूषण नियम में संशोधन करके सभी शांत क्षेत्रों को अधिसूचना से निकाल दिया है, इसलिए अब कोई भी क्षेत्र राज्य में शांत क्षेत्र नहीं है।

यह अदालत उन अनेक जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है जो महाराष्ट्र में शोर प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम का कड़ाई से पालन न होने को लेकर दायर की गई हैं।

इस साल 10 अगस्त को केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन किया था और उनके अनुसार अब कोई भी क्षेत्र तबतक शांत क्षेत्र नहीं कहला सकता, जबतक राज्य सरकार ने विशिष्ट घोषणा कर उस विशेष क्षेत्र को शांत क्षेत्र घोषित नहीं किया हो।

कुंभकोनी ने बताया कि इस संशोधन के बाद वे शांत क्षेत्र भी इस स्तर से बाहर कर दिए गए हैं जिन्हें अदालत के कहने पर 2016 में शांत क्षेत्र घोषित किया गया था। अब यदि सरकार को कुछ क्षेत्रों को शांत क्षेत्र घोषित करना है तो इसके लिए नए सिरे से कसरत करनी होगी। 2016 में उच्च न्यायायलय कहा था कि ये सभी शांत क्षेत्र हैं जो अस्पतालों, शैक्षिक संस्थानों, और कोर्ट-कचहरी के चारों तरफ की 100 मीटर की परिधि में आते हैं और उनके लिए किसी विशिष्ट घोषणा की जरूरत नहीं है।

कुंभकोनी ने स्पष्ट किया कि सरकार कोर्ट के आदेश की अवहेलना की कोशिश नहीं कर रही है लेकिन वह यह कोशिश जरूर कर रही है कि कोई सर्वमान्य रास्ता निकल सके। उन्होंने कहा कि यदि उच्च न्यायायलय के आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए तो मुंबई में एक भी इंच ऐसी जगह नहीं मिलेगी जो शांत क्षेत्र न हो।

इस पर न्यायाधीश ओक ने कहा कि सरकार न तो किसी क्षेत्र को शांत क्षेत्र घोषित कर रही है और न ही अदालत के निर्देशों का पालन कर रही है, उससे तो यही लगता है कि सरकार लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देने के लिए उतावली है।

जब अदालत को बताया गया कि 10 अगस्त तक सरकार ने किसी भी क्षेत्र को शांत क्षेत्र अधिसूचित नहीं किया है तो न्यायाधीश ओक ने पूछा कि 'शांत क्षेत्रों के अभाव और आगामी त्योहारों को देखते हुए सरकार ने नागरिकों के स्वास्थ्य को संभालने के लिए क्या-क्या उपाय किए हैं? ध्वनि का स्तर कितना डेसिबल रहेगा? इस पर कुंभकोनी ने कहा कि डेसिबल स्तर का निर्णय सरकार लाउडस्पीकर का उपयोग करने के लिए अनुमति देते हुए किया जाएगा।

अदालत ने अपने द्वारा बताए गए उपायों को लागू न करने पर सरकार को विफल बताया और कहा कि उसने अबतक टोल फ्री नंबर तक घोषित नहीं किया है। इस नंबर पर नागरिक अपनी वे शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, जो ध्वनि प्रदूषण और ट्रैफिक को रोक रहे पंडाल आदि के बारे में हैं। न्यायाधीश ओक का कहना था कि सरकार हमारे निर्देशों का पालन नहीं करा पा रही है। यह सब वह 'बहुत हल्के' से ले रही है।

No comments:

Post a Comment

Total Pageviews

Bottom Ad [Post Page]