जस्टिस विभु बख्रू ने कहा कि याचिकाकर्ता को पीने के पानी का हक है, लेकिन मुफ्त पीने के पानी का कोई अधिकार नहीं। अदालत का यह फैसला मेट्रो के एफिडेविट दाखिल करने के बाद आया। इसमें कहा गया है कि पानी के लिए मेट्रो स्टेशनों पर 128 वॉटर कियोस्क और 200 से ज्यादा दुकानें हैं। इन दुकानों से पैसे देकर पानी खरीदा जा सकता है। यहां पर 250 ml के लिए 2 रुपए और एक लीटर के लिए 5 रुपए चुकाना पड़ता है।
टॉइलट की सुविधा पर DMRC ने कहा कि यह 130 स्टेशनों पर उपलब्ध है। वहीं डस्टबिन के सवाल पर कॉर्पोरेशन ने बताया कि पहले सुविधा को ध्यान में रखते हुए कहीं पर भी डस्टबिन नहीं लगाए गए थे, लेकिन अब ट्रांसपैरेंट बिन को स्टेशनों पर इंस्टॉल करने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है।

No comments:
Post a Comment