इकोनामिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक, ये महिला आईएएस हैं गौरी पराशर, जो पंचकूला में उपायुक्त हैं। पंचकूला में जब हिंसा शुरू हुई तो एक बार तो पुलिस ने समर्थकों का गुस्सा देख पीछे हटना शुरू कर दिया था। ऐसे में गौरी पराशर जोशी ने मोर्चा संभाला और खुद आगे आई।
जब पुलिसकर्मियों ने घटनास्थल से डेरा के अनुयायियों खदेड़ने में नाकाम हुई और समर्थक लाठी-डंडे और पत्थरों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तो महिला अधिकारी ने आंदोलनकारियों को शांत करने की कोशिश की।
स्थिति संभालने के लिए सेना को दिया आदेश
हिंसा बढ़ती गई, इस दौरान11 महीने के बच्चे की इस मां को चोट भी लगी और उसके कपड़े भी फट गए। पुलिस ने उस महिला अधिकारी को एक पीएसओ के भरोसे अकेले छोड़ दिया, उसी स्थिति में वह अपने ऑफिस गई और स्थिति को संभालने के लिए सेना को आदेश दिया। जिससे स्थिति में सुधार हुआ और वहां लोगों को बचाने में मदद मिली।
अगर सेना नहीं बुलाई गई होती, तो आवासीय क्षेत्र में अभूतपूर्व विनाश होता। स्थानीय निवासी सतीदर नांगिया ने कहा कि, हम पिछले कुछ दिनों से चाय और बिस्कुट के साथ स्थानीय पुलिस की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन जब डेरा के अनुयायी हिंसा पर उतारु हुए तो, सबसे पहले स्थानीय पुलिस वहीं से भाग खड़ी हुई थी।
गौरी पराशर जोशी 3 बजे सुबह घर पहुंची, उससे पहले उन्होंने शहर के हर इलाके में जाकर खुद को आश्वस्त किया कि मामला अब पूरी तरह नियंत्रण में आ गया है। गौरी पराशर ने ओडिशा के कालाहांडी के नक्सल प्रभावित जिले में काम किया था और हो सकता है कि इस दौरान उनका वह अनुभव काम आया।

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