कंपोजीशन स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन को भी तीसरी बार 31 मार्च 2018 तक खोला जा सकता है। 3 महीने बाद भी कंप्लायंस की दिक्कतें खत्म नहीं...- कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के तीन महीने बाद भी कंप्लायंस की दिक्कतें खत्म नहीं हुई हैं। जीएसटी नेटवर्क पर तकनीकी खामियों के चलते रिटर्न फाइलिंग में भी समस्याएं आ रही हैं।
- छोटे कारोबारी रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म से भी परेशान हैं। इसमें सामान खरीदने वाले रजिस्टर्ड डीलर को टैक्स चुकाना पड़ता है। सूत्रों की मानें तो इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
- फाइनेंस अफसरों ने बताया कि मीटिंग में सुशील मोदी समिति भी अपनी रिपोर्ट रखेगी। इसका गठन जीएसटीएन में आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए किया गया था।
- समिति की सिफारिशों के आधार पर एक्सपोर्टर्स को कुछ राहत दी जा सकती है। माना जा रहा है कि एक्सपोर्टर्स को 10 अक्टूबर से आईजीएसटी का रिफंड मिलेगा।
- रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अढिया के साथ मीटिंग में एक्सपोर्टर्स ने कहा था कि रिफंड में देरी के कारण उनके 65,000 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं।
सिर्फ अंडरटेकिंग देकर कर सकेंगे एक्सपोर्ट
- सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक एक्सपोर्टर्स इंटीग्रेटेड जीएसटी चुकाए बिना सिर्फ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग देकर एक्सपोर्ट कर सकते हैं।
- अंडरटेकिंग इस बात की होगी कि अगर टैक्स डिमांड निकलती है, तो एक्सपोर्टर टैक्स चुकाएगा। अगर कारोबारी एक्सपोर्ट करने में नाकाम रहता है या एक्सपोर्ट का पेमेंट नहीं मिलता है, तो उसे इंटरेस्ट समेत आईजीएसटी चुकाना पड़ेगा।
- ऐसा न करने पर बिना टैक्स चुकाए एक्सपोर्ट की फैसिलिटी वापस ले ली जाएगी। टैक्स कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग के पार्टनर अभिषेक जैन ने बताया कि इस कदम से छोटे एक्सपोर्टर्स को फायदा होगा।
पर्रिकर ई-वे बिल का विरोध करेंगे
- जीएसटी के कुछ प्रोविजन्स का अब बीजेपी नेताओं ने भी विरोध शुरू कर दिया है।
- गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि वह जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में ई-वे बिल का कड़ा विरोध करेंगे। यह ‘सिंगल टैक्स’ की भावना के खिलाफ है।
- पर्रिकर ने कहा, ‘मैं ई-वे बिल का विरोध करूंगा। ई-वे बिल को लागू नहीं किया जाना चाहिए। यह एक टैक्स की धारणा को ही खत्म कर देता है।’
- जीएसटी एक्ट में प्रावधान है कि 50,000 रु. से ज्यादा के सामान के ट्रांसपोर्टेशन के लिए ई-वे बिल जरूरी होगा। यह जीएसटीएन पोर्टल से जेनरेट होगा।
- छोटे कारोबारी रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म से भी परेशान हैं। इसमें सामान खरीदने वाले रजिस्टर्ड डीलर को टैक्स चुकाना पड़ता है। सूत्रों की मानें तो इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
- फाइनेंस अफसरों ने बताया कि मीटिंग में सुशील मोदी समिति भी अपनी रिपोर्ट रखेगी। इसका गठन जीएसटीएन में आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए किया गया था।
- समिति की सिफारिशों के आधार पर एक्सपोर्टर्स को कुछ राहत दी जा सकती है। माना जा रहा है कि एक्सपोर्टर्स को 10 अक्टूबर से आईजीएसटी का रिफंड मिलेगा।
- रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अढिया के साथ मीटिंग में एक्सपोर्टर्स ने कहा था कि रिफंड में देरी के कारण उनके 65,000 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं।
सिर्फ अंडरटेकिंग देकर कर सकेंगे एक्सपोर्ट
- सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक एक्सपोर्टर्स इंटीग्रेटेड जीएसटी चुकाए बिना सिर्फ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग देकर एक्सपोर्ट कर सकते हैं।
- अंडरटेकिंग इस बात की होगी कि अगर टैक्स डिमांड निकलती है, तो एक्सपोर्टर टैक्स चुकाएगा। अगर कारोबारी एक्सपोर्ट करने में नाकाम रहता है या एक्सपोर्ट का पेमेंट नहीं मिलता है, तो उसे इंटरेस्ट समेत आईजीएसटी चुकाना पड़ेगा।
- ऐसा न करने पर बिना टैक्स चुकाए एक्सपोर्ट की फैसिलिटी वापस ले ली जाएगी। टैक्स कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग के पार्टनर अभिषेक जैन ने बताया कि इस कदम से छोटे एक्सपोर्टर्स को फायदा होगा।
पर्रिकर ई-वे बिल का विरोध करेंगे
- जीएसटी के कुछ प्रोविजन्स का अब बीजेपी नेताओं ने भी विरोध शुरू कर दिया है।
- गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि वह जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में ई-वे बिल का कड़ा विरोध करेंगे। यह ‘सिंगल टैक्स’ की भावना के खिलाफ है।
- पर्रिकर ने कहा, ‘मैं ई-वे बिल का विरोध करूंगा। ई-वे बिल को लागू नहीं किया जाना चाहिए। यह एक टैक्स की धारणा को ही खत्म कर देता है।’
- जीएसटी एक्ट में प्रावधान है कि 50,000 रु. से ज्यादा के सामान के ट्रांसपोर्टेशन के लिए ई-वे बिल जरूरी होगा। यह जीएसटीएन पोर्टल से जेनरेट होगा।

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