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मध्य रेलवे पर नई समय सारिणी की घोषणा के बाद लोकल ट्रेनों में महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था हुई है। महिलाओं के लिए विशेष लोकल की संख्या अब 4 हो गई है। इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले समय की 20 सेवाओं में (प्रत्येक सर्विस में) 3 कोच महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इससे करीब 2,000 महिला यात्रियों के लिए भीड़-भाड़ वाले समय में जगह निर्धारित हुई है। 12 डिब्बों की एक लोकल में आमतौर पर 25 प्रतिशत कोच महिलाओं के लिए उपलब्ध होते हैं। नए बदलाव के बाद अब भीड़भाड़ वाले समय में महिलाओं के लिए प्रत्येक ट्रेन में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित हो गया है। इस साल मध्य रेलवे पर महिला विशेष ट्रेनों को चलते हुए 25 साल पूरे हो जाएंगे।

महिला विशेष ट्रेनों का इतिहास
मध्य रेलवे ने 1 जुलाई 1992 को पहली बार महिला विशेष लोकल ट्रेन चलाई गई थी। समय के साथ-साथ महिलाओं के लिए आरक्षित लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाई गई। दरअसल, सन 1990 के बाद मुंबई में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ, जिसके चलते महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ने लगी। खासतौर से उत्तर मुंबई से दक्षिण मुंबई की ओर आने वाली नौकरीपेशा महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

मुंबई में सबसे ज्यादा नौकरीपेशा महिलाएं
रेलवे के लिए तैयार की गई टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में अन्य शहरों के मुकाबले मुंबई में नौकरीपेशा महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। लगभग 6.5 लाख महिलाएं रोजाना उपनगरीय मुंबई से दक्षिण मुंबई आती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तेज गति की लोकल में 77 प्रतिशत पुरुष और 23 प्रतिशत महिला यात्री होती हैं। हार्बर लाइन पर 21 प्रतिशत और ट्रांस हार्बर पर 22 प्रतिशत महिलाएं प्रत्येक लोकल ट्रेन में सफर करती हैं। शहरों में यात्रा के तरीकों पर विल्बर स्मिथ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई की धीमी लोकल ट्रेनों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा यात्रा करती हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 'प्रत्येक 12 डिब्बों की ट्रेन में 3-3 प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कोच होते हैं। आरक्षित कोच होने के बावजूद भीड़-भाड़ वाले समय में महिला यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसलिए नई समय सारिणी में महिलाओं के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध कराई गई है।'

अधिकारी के अनुसार, 'एक पूरी ट्रेन को महिला यात्रियों के लिए आरक्षित कर देना अच्छी युक्ति नहीं है। इससे आम यात्रियों के लिए एक ट्रेन कम हो जाती है और महिलाओं के लिए आरक्षित ट्रेन की पूरी क्षमता का उपयोग भी नहीं होता है। इसलिए महिलाओं के लिए प्रत्येक ट्रेन में 3 कोच निर्धारित करने से उद्देश्य पूरा हो जाता है। भीड़भाड़ वाले समय में महिलाओं की यात्रा के तरीके का अध्ययन करने के बाद ही अब 2 ट्रेनों में 6 कोच महिलाओं के आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है।'

'गहन अध्ययन के बाद ही समय सारिणी में बदलाव किए गए हैं। कल्याण से आगे जाने वाली ट्रेनों में महिला यात्रियों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत थी।'
-सुनील उदासी
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (मध्य रेलवे)

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