1 जनवरी 2018 से कई चीजें बदलने वाली हैं। कुछ बदलाव हमारी बचत बढ़ाएंगी तो कुछ हमारी जेब पर भारी भी पड़ेंगी। डेबिट कार्ड और भीम ऐप से पेमेंट पर फीस में रियायत मिलेगी तो दूसरी तरफ कार और बाइक खरीदना महंगा पड़ेगा। छोटी सेविंग स्कीम्स पर ब्याज भी कम मिलेगा। जिन बैंकों का एसबीआई में विलय हुआ था, उनके चेक अमान्य हो जाएंगे। 1 जनवरी से पूरे देश में किसानों को फर्टिलाइजर सब्सिडी बैंक खाते में मिलेगी।
डेबिट कार्ड: 2,000 रु. तक के पेमेंट पर फीस नहीं
- डेबिट कार्ड, भीम ऐप, यूपीआई या आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के जरिए 2,000 रुपए तक के पेमेंट पर कोई फीस नहीं लगेगी।
- इस पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट का भुगतान सरकार बैंकों को करेगी। अभी दुकानदार मर्चेंट डिस्काउंट रेट के रूप में लगने वाली फीस बैंकों को देते हैं। ज्यादातर दुकानदार यह रकम ग्राहकों से ही वसूलते हैं।
ऑटोमोबाइल: 25,000 रुपए तक बढ़ जाएंगे कारों के दाम
कार और बाइक कंपनियां वाहनों के दाम बढ़ा रही हैं। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति ने अलग-अलग मॉडल के दाम 22,000 रुपए, फॉक्सवैगन ने 20,000 रुपए, टाटा मोटर्स और होंडा ने 25,000 रुपए और टोयोटा, स्कोडा और महिंद्रा ने 3% तक बढ़ाने का ऐलान किया है। टू- व्हीलर भी कुछ महंगे होंगे।
चेकबुक: एसबीआई में विलय होने वाले बैंकों के चेक अमान्य
एसबीआई में विलय होने वाले बैंकों के चेकबुक 1 जनवरी से मान्य नहीं होंगे। ये बैंक हैं- स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और भारतीय महिला बैंक। इन बैंकों का अप्रैल में ही एसबीआई में विलय हो गया था।
लघु बचत: छोटी बचत योजनाओं पर 0.2% कम ब्याज मिलेगा
- छोटी सेविंग स्कीम पर इंटरेस्ट 0.2% कम हो जाएगा। जनवरी-मार्च तिमाही में एनएससी और पीपीएफ पर 7.6% ब्याज मिलेगा।
- किसान विकास पत्र पर ब्याज दर 7.3% और सुकन्या समृद्धि पर 8.1% होगी। सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम पर 8.3% का इंटरेस्ट रेट बरकरार रखा गया है।
डीबीटी: पूरे देश में किसानों को बैंक खाते में मिलेगी फर्टिलाइजर सब्सिडी
- 1 जनवरी से पूरे देश में किसानों को उर्वरक सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में मिलेगी। इससे सब्सिडी का दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी।
- 14 राज्यों को छोड़ बाकी देश में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। जो राज्य इसे लागू करने में पीछे हैं, उनमें गुजरात, झारखंड, बिहार जैसे राज्य शामिल हैं।
जीएसटी: 1 फरवरी से दूसरे राज्य में सप्लाई के लिए ई-वे बिल जरूरी
- ई-वे बिल 1 फरवरी से लागू होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान ले जाने के लिए यह जरूरी है।
- राज्य के भीतर सप्लाई के लिए यह 1 जून से जरूरी होगा। बिल का फॉर्मेट 15 जनवरी से मिलने लगेगा। इसके बाद दो हफ्ते तक कारोबारी ट्रायल के तौर पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।


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