*जन जन की आस्था का केंद्र मिनी पालीताना के नाम से मशहूर शहापुर का श्री शत्रुंजय तीर्थ धाम*
मुंबई महानगर से सटे ठाणे जिले को जैन मंदिरों का गढ़ कहे तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी।घोडबंदर-काशी मीरा रोड का पीयूष पानी,कॉमन का शंखेश्वर धाम,शिरसाड का महावीर धाम,नाकोड़ा धाम,वसई का आगासी,मोहना कल्याण का राजेन्द्र धाम,एव शहापुर का श्री शत्रुंजय तीर्थ मानस मन्दिर,अहमदाबाद हाइवे का लोढा धाम,आदि कई छोटे बड़े तीर्थ जो ऐतिहासिक एव कलात्मक दृष्टि से अपने आप मे विभिन योग्यताएं लिए हमारे समाज की धरोहर बन चुके है।
इनमें से प्रमुख शहापुर का श्री शत्रुंजय तीर्थ धाम भुवन भानु मानस मन्दिरम जो मुम्बई से लगभग 90,ठाणे से 60,भिवंडी से 45 किलोमीटर दूर है।
मुम्बई-आगरा हाइवे राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित शहापुर से 3 किलोमीटर दूर पहाडियो से घिरे इस सुंदर, मनोरम तीर्थ में जून से नवम्बर तक हरियाली ही हरियाली छाई रहती है।यह तीर्थ मुम्बई छत्रपति शिवजी टर्मिनल (वी टी) स्टेशन से कसारा रेल मार्ग पर स्थित आसनगांव रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर दूर है।
यह तीर्थ नाशिक से लगभग 95 किलोमीटर दूर मुम्बई हाइवे पर है।
यहा से हर समय रिक्शा,टेक्सी,आदि की व्यवस्था तीर्थ तक रहती है।
सम्पूर्ण महाराष्ट्र सहित देश भर में कम ही समय में अपनी छाप छोड़ने इस तीर्थ को गुजरात स्थित पालीताना की तर्ज पर बनाया गया है इसलिए इसे बोलचाल की भाषा मे मिनी पालीताना के नाम से जाना जाता है।
इस तीर्थ के सम्पूर्ण निर्माण का श्रेय परम् पूज्य युवा ह्रदय सम्राट आचार्य देव श्रीमद विजय हेमरत्न सूरीश्वर को जाता है।उनकी ही पावन प्रेरणा,शुद्ध बुद्ध,दिव्य मार्गदर्शन एव आशीर्वाद से ही यह तीर्थ दिन दुगनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है।
वैसे तो इस तीर्थ पर साल भर यात्रियों का आना जाना जारी रहता है ,लेकिन विशेष रूप से वर्ष में एक बार फाल्गुन सूदी १३ तेरस को छ:गाउ यात्रा का आयोजन किया जाता है जिसे फागण फेरी के नाम से भी जाना जाता है।
फागण फेरी छ:गाउ यात्रा का महत्व अलग ही रहता है इस अवसर महाराष्ट्र,मुम्बई सहित देश भर से हजारों-लाखों जैन अजैन श्रद्धालु आते है और दादा आदिनाथ मनवंचित फल पाते है।
आगामी फाल्गुन सुदी १३ दिनांक 27 फरवरी 18 मंगलवार को (21 वी छ्गाउ यात्रा) छ्गाउ यात्रा का आयोजन तीर्थ ट्रस्ट मण्डल द्वारा किया जा रहा है।इस अवसर पर एक मेले जैसा माहौल बना रहता है तीर्थ यात्रियों को कतार से दर्शन करवाना,पूजा पाठ व्यवस्था,खान पान व्यवस्था,प्रसाद व्यवस्था,तथा फेरी की यात्रा करवाना ,खाने पीने के विविध पंडाल/पाल सामाजिक एव धार्मिक संघटनो द्वारा ट्रस्ट मण्डल के आदेश से लगाए जाते है बड़े ही ह्रदय भाव से मनुहार कर यात्रियों को प्रसाद आदि खिलाया जाता है।
रात्रि से ही यात्रियों का आना जारी हो जाता है जो पूरे दिन चलता रहता है।सुबह मंदिर खुलते ही पूजा एव दर्शन करने वालो की लंबी कतारें लग जाती है जिसकी व्यवस्था जैन युवा संघटनो द्वारा की जाती हैं।स्थानीय पुलिस एव तीर्थ के निजी सुरक्षा रक्षकों द्वारा सम्पूर्ण मेले में सुरक्षा प्रदान की जाती है।
समूचे मन्दिर परिषर को आकर्षक रोशनी एव फूलों से सजाया जाता है जो दृश्य देखने लायक होता है।
समूचा मन्दिर परिसर आकर्षक रंगों के परिधानों से संवर जाता है।सभी यात्री अपनी अपनी परम्परागत परिधानों से सुसजित होकर चारो ओर मंगल ही मंगल की कामना करते है।
रंगीन वेशभूषाओं के बीच पूजा के ड्रेस वस्त्रों में चलते श्रद्धालु अपने आपको हल्का महसूस करते है ओर यहाँ मूलनायक भगवान श्री आदेश्वर दादा की ६३ इंची मुह बोलती प्रतिमा जिसके नेत्रों की ओर जब श्रद्धा से अभिभूत भक्त की दृष्टि जाती है तो ऐसा लगता है मानो उनमे एक गुरुत्वाकर्षण बल सी ताकत हो।
वो बोलती हुई आंखे ओर उनके होठो की स्मित रेखा कह रही हो मानो सब कुछ मंगल ही मंगल होगा।
यहाँ आने पर ऐसा लगता है कि उनके आशीर्वाद की छाया में सब कल्याण ही कल्याण होगा दुख शोक या अभाव का ताप जैसे नष्ट सा हो गया हो।यह असीम श्रद्धा एव भक्ति से मांगी गई हर मन्नत (ईच्छा)पूरी करने वाले श्री क्षेत्रपाल दादा महाराजा के दरबार से कोई खाली हाथ नही लोटता है।
छ्गाउ यात्रा के पावन प्रसंग,अवसर पर जगह जगह यात्रियों के रुकने,ठहरने आदि के लिए छाया टेंट आदी लगाकर की जाती है।
तलहटी से उतरते हुवे नदी के पास ही लंबे एव बड़े मैदान पर विबिध संघटनो द्वारा यात्रियों के लिए खाने पीने के विविध स्टाल लगाए जाते है।जिसमे कलीनगर,अंगूर,मौसमी जयुस,चाय,दूध काफी,निम्बू पानी,वरियाली पानी,शाही करबा,फरसाण,पवा,खाखरा,मुखवास,की व्यवस्था रहती है ।
तीर्थ ट्रस्ट मण्डल द्वारा ड्राय फ्रूट की व्यवस्था रहती है।
यहा पर एकासना, बेयासना,आयम्बिल, उपवास आदि की अलग से व्यवस्था रहती है।
यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख यात्री आते है । एव 3 हजार साधु साध्वी जी का विचरण होता है।
*यहा पर निम्न भगवान विराजमान है।*
*श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ,श्री मुनिसुव्रत स्वामी,घीया पार्श्वनाथ, केशरिया आदिनाथ,विरपाट परम्परा में 106 पट्टधर सवर्ण गुरु मन्दिर में पुण्डरीक स्वामी,अन्य कई देवी देवताओं की प्रतिमा भी विरजमान है जिसमे नाकोड़ा भेरूजी,पद्मावती माताजी आदि।*
यहां पर ओर भी अन्य कई निर्माण कार्य जारी है।एक आर्ट गलेरी का कार्य भी जारी है।
इस तीर्थ में यात्रियों के रहने के लिए आधुनिक सुविधाओं सहित 207 कमरे,10 बड़े हॉल, दो भोजनशाला,उपधान आदि के लिए उपयुक्त स्थान है जहाँ पिछले 15 वर्षों से विविध तपस्याएं निरविधिन चल रही हैं।
*इस तीर्थ पर अनेक साधु संतों आदि के आगमन के कारण यहाँ कई उपधान तप,ओली जी,दीक्षा के कार्यक्रम होते रहते है।*
*यह तीर्थ जन जन में लोकप्रिय होने के कारण यहाँ कई जैन संघो,जैन युवा संघटनो आदि के स्नेह समेलन,मीटिंग इत्यादि होते रहते है।*
यहा पर हर समय सुबह में नवकारसी एव सुबह-शाम दोनो समय भोजन की सुंदर व्यवस्था रहती है।
*बुजुर्ग यात्रियों आदि को मन्दिर तक लाने ले जाने के लिए विशेष रूप से रिक्शो,टेम्पो की व्यवस्था रहती है।*
*तीर्थ के मेनेजर विपुल भाई ने बताया कि छ्गाउ यात्रा के दिन तीर्थ की तरफ से आसनगांव रेलवे स्टेशन से यात्रियों को तीर्थ तक लाने ले जाने के लिए महाराष्ट्र राज्य की बसों (एस टी) की विशेष व्यवस्था रहती है।*
महराष्ट्र,मुम्बई सहित देश भर से आने वाले यात्रियों के हजारो वाहनों की व्यवस्था लगभग 3 किलोमीटर के दायरे में सामाजिक संस्थाओं द्वारा बहुत ही सुंदर तरीके से व्यवस्थित रूप से की जाती हैं।
यहा पर संघ के रूप में आने वाले यात्रियों के ठहरने खाने पीने की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन एव फोन द्वारा एडवांस बुकिंग द्वारा की जाती है,तीर्थ के संपर्क नम्बर :-
0855190488
0855190888
इस तीर्थ में प्रातः कालीन सूर्य जहा सपूर्ती,चेतना और राग का संदेश देता है तो अस्त होता सूर्य विराग का,शांति का,संतोष का ओर मंजिल तक पहुचने की तृप्ति ओर निश्चितता का स्वर धीरे धीरे कानो के पास गुण गुनाने लगता है।
*दादा आदिनाथ के चरणो में कोटि कोटि वन्दना।*
*आप भी एक बार इस तीर्थ की स्पर्सना कीजिये और अपने आप को धन्य बनाइये।*
लेखन एव फ़ोटो
चम्पालाल छाजेड़


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