Post Page Advertisement [Top]

2577वाँ जिन शासन स्थापना दिवस 

जैन धर्म अनादिकाल से विद्यमान है। तीर्थंकर भगवान को केवलज्ञान होने के बाद शासन की स्थापना करते हैं। प्रभु वीर साढ़े बारह वर्ष की घोर साधना करके वैशाख शुक्ल 10 के दिन चार घाती कर्म के क्षय करके केवल ज्ञान की प्राप्ति करते हैं और तुरंत समवसरण में देशना देते हैं। प्रभु की वाणी सुनकर इंद्रभूति गौतम स्वामी सहित 11 गणधरों ने दीक्षा ली। चंदनबाला साध्वी बनीं, बारह व्रतधारी श्रावक-श्राविका बनें और फिर प्रभु वीर ने श्रमण-प्रधान चतुर्विध संघ (साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका) की स्थापना की, वह दिन है “वैशाख शुक्ल एकादशी” अर्थात “शासन स्थापना दिवस”। महावीर प्रभु का जिन शासन 21000 वर्ष तक चलेगा जो वर्तमान में चल रहा है। तब से अब तक जैन धर्मावलंबियों द्वारा हर वर्ष शासन स्थापना दिवस पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और विश्व शांति व कल्याण की कामना व भावना व्यक्त की जाती है।

प्रभु महावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना कर हम पर अनंत उपकार किया। जैनियों के लिए यह गौरव का अत्यंत ऐतिहासिक दिन है। श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र व जैन एसोसिएशन इंटरनेशनल के चेयरमैन सुनील सांखला जैन ने बताया कि वर्तमान कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की स्थिति में समस्त जैन समाज से निवेदन किया गया है कि रविवार दिनांक 23 मई 2021 के इस पावन दिवस पर अपने-अपने घर पर परिवार एक साथ एक-एक सामायिक प्रातः: 9 बजे से करने का लक्ष्य रखे। पुरे विश्व में जैन धर्मावलम्बी इस पावन दिवस पर लाखों सामायिक कर विश्व में सभी प्राणियों के प्रति मंगलकामना करेंगे और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करेंगे। भारत में करीब पंद्रह हज़ार से ज़्यादा साधु-साध्वी अलग- अलग क्षेत्र में विराजमान है, वह भी इस दिन विश्व शांति के लिए प्रार्थना करेंगे । साथ ही अपने-अपने घर में जैन ध्वज लगाए एवं ध्वज प्रति सम्मान व श्रद्धा का संकल्प भी लें।

डॉ. दिलीप धींग ने बताया कि इसी दिवस अखिल भारतीय श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के तृतीय पट्टधर आचार्य सम्राट् श्री देवेन्द्र मुनि जी म. का महाप्र्रयाण दिवस भी है। वर्ष 2001 में राजस्थान सरकार ने आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी म. की स्मृति को अक्षुण्ण रखने हेतु वैशाख शुक्ला एकादशी को सम्पूर्ण राज्य में ‘अहिंसा दिवस’ (अगता) के रुप में घोषित किया है।

सामायिक क्या है?
इस अवसर पर श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने बताया कि सामायिक जैन धर्म में उपासना का अभिन्न अंग है। दो घड़ी अर्थात 48 मिनट तक समतापूर्वक शांत होकर किया जाने वाला धर्म-ध्यान ही सामायिक है। जैन आगमो में ऐसा वर्णन है कि चाहे गृहस्थ हो या साधु सामायिक सभी के लिए अनिवार्य है। अपने जीवनकाल में से प्रत्येक दिन केवल दो घड़ी का धर्म ध्यान करना ही सामायिक कहलाता है। सामायिक का अर्थ है आत्मा में रमण करना समता पूर्वक पाप का त्याग करना ही सामायिक है। श्रावक/श्राविका के 12 व्रत में से 9वां व्रत सामायिक का है और साधू/साध्वीजी का सम्पूर्ण जीवन ही सामायिक है। सामायिक ग्रहण करने के 9 सूत्र होते हैं, प्रत्येक सूत्रों को बोलकर सामायिक ग्रहण की जाती है, उसके पश्चात 48 मिनट तक मन, वचन, और काया से 32 दोषो को टाला जाता है, जिसमें 10 मन के, 10 वचन के और 12 काया के दोष माने जाते हैं।

जैन एसोसिएशन इंटरनेशनल व देश भर के विभिन्न जैन संगठनों के संयोजन से समस्त जैन समाज द्वारा विश्व स्तर एक सामायिक शासन के नाम के रूप में मनाते हुए सामायिक के सामूहिक प्रयोग एवं अनुष्ठान को आयोजित करने का निर्णय लिया है। वर्चुअल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से गुरु-भगवंतों द्वारा विशेष सन्देश एवं मंगलपाठ प्रदान करेंगे।

No comments:

Post a Comment

Total Pageviews

Bottom Ad [Post Page]