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*सुविशाल गच्छाधिपति, श्रीमद् जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा*. की *पावन निश्रा* में *2 नवम्बर* को *जयन्तसेन धाम(रतलाम म.प्र)* में *शतावधान का अनुपम आयोजन होगा* । इसमें स्मरण शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया जाएगा । *आध्यात्मिक विकास यात्रा में साधक कई सिद्धियां प्राप्त करता है और इन्हीं सिद्धियों में से एक शतावधान प्रयोग भी हे* । बहुत कम साधक ही ऐसी शक्ति को धारण करते हैं बाल मुनिराजश्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. गच्छाधिपतीश्री की निश्रा में पहली बार इस आयोजन में 108 बिन्दुओं की प्रस्तुति करेंगे। इसमें *गच्छाधिपतीश्री के शिष्य बालमुनी मुनिराजश्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. द्वारा स्मरण शक्ति के माध्यम से श्रीसंघ में प्रथम बार शतावधान प्रस्तुत किया जाएगा*। एक साथ सौ या इससे अधिक शब्दों का स्मरण कर अनुक्रम, अनानुक्रम, पश्चानुक्रम से बोलने की क्रिया शतावधान है । *इस कार्यक्रम में उपस्थित जनों द्वारा 108 शब्द कहे जाएंगे, जिसे अन्त में मुनिश्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. पहले अनुक्रम, फिर अनानुक्रम, पश्चात क्रमांक तक शब्द एवं शब्द पर क्रमांक उपस्थितजनों के सामने प्रस्तुत करेंगे* । ज्ञातव्य है कि *स्मरण शक्ति, ध्यान शक्ति, कृपा शक्ति की त्रिवेणी का संगम होने पर ही व्यक्ति शतावधान के लिए सक्षम बन पाता हे* ।

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