भारत पूरी दुनिया में सातवां सबसे बड़ा देश है, जहाँ हज़ारों से भी ज्यादा विभिन्न संस्कृतियां समायी हुई हैं। इन्हीं सांस्कृतिक विविधताओं के साथ-साथ, भारत कई बायोस्फीयर रिज़र्वस का भी घर है। भारत के ये बायोस्फियर रिज़र्वस कई वन्य जीवों, जनजातीय समुदायों और अद्वितीय वनों के संरक्षण में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। आप सोच रहे होंगे कि ये बायोस्फियर रिज़र्व क्या हैं? बायोस्फीयर रिज़र्व असामान्य वैज्ञानिक और प्राकृतिक हित के लिए पौधों और जानवरों का एक पारिस्थितिकी तंत्र है। यह लेबल या यह नाम इन्हें यूनेस्को द्वारा दिया गया है, जिससे कि इन जगहों की रक्षा की जा सके। इन सारे रिज़र्वस को कई लुप्तप्राय जीवों का प्राकृतिक स्थल भी घोषित कर दिया गया है।
अचानकमार: अमरकंटक बायोस्फियर रिज़र्व भारत के दो राज्यों, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश क्षेत्रों में फैला हुआ है। यह मैकल पर्वत श्रेणियों से लेकर विंध्य व सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों पर स्थित है। इसका यह नाम यहाँ स्थित अचानकमार अभ्यारण्य व अमरकंटक, जो तीन पवित्र नदियों नर्मदा, सोन तथा जोहिल्ला का उदगम स्थल है, के नामों पर पड़ा है।
अगस्त्यमलाई: केरल एवं तमिलनाडु में फैले अगस्त्यमलाई जैवमंडल क्षेत्र की स्थापना वर्ष २००१ में की गई थी। यहां कई तरह के जनजाति समुदाय भी रहते हैं।
सिमलीपाल: ओडिशा के सिमलीपाल को भारत सरकार द्वारा २२ जून, १९९४ में बायोस्फियर रिज़र्व अधिसूचित कर दिया गया था। सिमलीपाल पूर्वी घाट के पूर्वी छोर में स्थित है और छोटा नागपुर में महानदी जैव भौगोलिक क्षेत्र के जैविक प्रान्त में वर्गीकृत है।
कोल्ड डेज़र्ट: पिन घाटी के राष्ट्रीय उद्यान, उसके आसपास के क्षेत्र, चन्द्रतल और सरचु व किब्बर वन्यजीव अभ्यारण्य के क्षेत्रों को मिलाकर अधिसूचित किया गया है।
गल्फ ऑफ़ मन्नार: एक बड़ी खाड़ी, जो हिन्द महासागर में लास्साडिव सागर का एक हिस्सा है। यह कोरोमंडल तट क्षेत्र में भारत के दक्षिणी सिरे और श्रीलंका के पश्चिमी तट के बीच स्थित है।
बड़ा निकोबार: भारत का वन्य संरक्षित क्षेत्र, जो अण्डमान व निकोबार द्वीप समूह के बड़े निकोबार द्वीप पर स्थित है। भारत सरकार ने इसे जनवरी, १९८९ में स्थापित किया था और इसमें भारत के कैम्पबॅल बे और गैलेथिआ दो राष्ट्रीय उद्यान सम्मिलित हैं।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान: यह उद्यान भारत के उत्तराखण्ड राज्य में नन्दा देवी पर्वत के आस-पास का इलाका है। इसको सन् १९८२ में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को मिलाकर सन् १९८८ में इसे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया।
नीलगिरी: दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट और नीलगिरी पर्वत पर स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फियर रिज़र्व है। इसे सन् २०१२ में यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर घोषित कर दिया गया था।
नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान: भारत के मेघालय राज्य में पश्चिम गारो हिल्स जिले में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है। इसकी स्थापना जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी।
पंचमढ़ी: मध्यप्रदेश राज्य में सतपुड़ा पर्वत पर स्थित यह एक गैर उपयोग संरक्षण क्षेत्र है। इसे भारत सरकार द्वारा सन् १९९९ में संरक्षण क्षेत्र घोषित कर दिया गया था और यूनेस्को ने इसे २००९ में बायोस्फियर रिज़र्व नामित किया।
सुंदरबन: भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है। यह क्षेत्र मैन्ग्रोव के घने जंगलों से घिरा हुआ है और रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है।
सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान: ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट में स्थित जैव विविधता वाले क्षेत्रों में मुख्यतः नमीदार मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, नमीदार मिश्रित पतझड़ीय वन तथा घास के मैदानों का यह क्षेत्र असम के तिनसुकिया जिले में स्थित है। विश्व के अनेक देशों से पर्यटक और विज्ञानी यहाँ घुमने और अध्ययन के लिए आते हैं। जंगली घोड़ा और वुड डक इस पार्क के मुख्य आकर्षण है।
देहांग: देबांग बायोस्फियर रिज़र्व भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में सन १९९८ में गठित किया गया था, जिसके अन्तर्गत मॉलिंग राष्ट्रीय उद्यान व दिबांग वन्य जीव अभ्यारण्य आते हैं।
कंचनजंगा: सिक्किम में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे १७ जुलाई, २०१६ में यूनेस्को के वैश्विक धरोहरों की सूचि में शामिल कर लिया गया है और यह भारत की सबसे पहली मिश्रित विरासत स्थल है।
कच्छ: गुजरात प्रांत में कच्छ जिले के उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ नमकीन दलदल का वीरान प्रदेश है। इस बायोस्फियर रिज़र्व के अन्तर्गत कच्छ मरुस्थलीय अभ्यारण्य और जंगली गधा अभयारण्य सम्मिलित हैं।
सेशाचलम पर्वत: दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में पूर्वी घाट की पहाड़ी पर्वतमालाओं का एक हिस्सा है। हिन्दू धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल, तिरुपति इन्हीं पहाड़ियों पर स्थित है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान: पन्ना शहर के पास में स्थित है लेकिन यह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का हिस्सा है। यह पार्क राज्य का पांचवा और देश का बाईसवां टाइगर रिजर्व पार्क है। इस पार्क को पर्यटन मंत्रालय के द्वारा सम्मानित किया गया है।
मानस राष्ट्रीय उद्यान: यह उद्यान एक सींग का गैंडा और बारहसिंघा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसे सन १९८५ में वैश्विक धरोहर का दर्जा दिया गया था लेकिन अस्सी के दशक के अंत में बोडो विद्रोही गतिविधियों के कारण १९९२ में वैश्विक धरोहर स्थल की सूची से हटा लिया गया। बाद में फिर से इसे जून २०११ में पुन: यूनेस्को की वैश्विक धरोहर में शामिल कर लिया गया।
अचानकमार: अमरकंटक बायोस्फियर रिज़र्व भारत के दो राज्यों, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश क्षेत्रों में फैला हुआ है। यह मैकल पर्वत श्रेणियों से लेकर विंध्य व सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों पर स्थित है। इसका यह नाम यहाँ स्थित अचानकमार अभ्यारण्य व अमरकंटक, जो तीन पवित्र नदियों नर्मदा, सोन तथा जोहिल्ला का उदगम स्थल है, के नामों पर पड़ा है।
अगस्त्यमलाई: केरल एवं तमिलनाडु में फैले अगस्त्यमलाई जैवमंडल क्षेत्र की स्थापना वर्ष २००१ में की गई थी। यहां कई तरह के जनजाति समुदाय भी रहते हैं।
सिमलीपाल: ओडिशा के सिमलीपाल को भारत सरकार द्वारा २२ जून, १९९४ में बायोस्फियर रिज़र्व अधिसूचित कर दिया गया था। सिमलीपाल पूर्वी घाट के पूर्वी छोर में स्थित है और छोटा नागपुर में महानदी जैव भौगोलिक क्षेत्र के जैविक प्रान्त में वर्गीकृत है।
कोल्ड डेज़र्ट: पिन घाटी के राष्ट्रीय उद्यान, उसके आसपास के क्षेत्र, चन्द्रतल और सरचु व किब्बर वन्यजीव अभ्यारण्य के क्षेत्रों को मिलाकर अधिसूचित किया गया है।
गल्फ ऑफ़ मन्नार: एक बड़ी खाड़ी, जो हिन्द महासागर में लास्साडिव सागर का एक हिस्सा है। यह कोरोमंडल तट क्षेत्र में भारत के दक्षिणी सिरे और श्रीलंका के पश्चिमी तट के बीच स्थित है।
बड़ा निकोबार: भारत का वन्य संरक्षित क्षेत्र, जो अण्डमान व निकोबार द्वीप समूह के बड़े निकोबार द्वीप पर स्थित है। भारत सरकार ने इसे जनवरी, १९८९ में स्थापित किया था और इसमें भारत के कैम्पबॅल बे और गैलेथिआ दो राष्ट्रीय उद्यान सम्मिलित हैं।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान: यह उद्यान भारत के उत्तराखण्ड राज्य में नन्दा देवी पर्वत के आस-पास का इलाका है। इसको सन् १९८२ में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को मिलाकर सन् १९८८ में इसे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया।
नीलगिरी: दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट और नीलगिरी पर्वत पर स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फियर रिज़र्व है। इसे सन् २०१२ में यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर घोषित कर दिया गया था।
नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान: भारत के मेघालय राज्य में पश्चिम गारो हिल्स जिले में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है। इसकी स्थापना जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी।
पंचमढ़ी: मध्यप्रदेश राज्य में सतपुड़ा पर्वत पर स्थित यह एक गैर उपयोग संरक्षण क्षेत्र है। इसे भारत सरकार द्वारा सन् १९९९ में संरक्षण क्षेत्र घोषित कर दिया गया था और यूनेस्को ने इसे २००९ में बायोस्फियर रिज़र्व नामित किया।
सुंदरबन: भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है। यह क्षेत्र मैन्ग्रोव के घने जंगलों से घिरा हुआ है और रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है।
सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान: ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट में स्थित जैव विविधता वाले क्षेत्रों में मुख्यतः नमीदार मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, नमीदार मिश्रित पतझड़ीय वन तथा घास के मैदानों का यह क्षेत्र असम के तिनसुकिया जिले में स्थित है। विश्व के अनेक देशों से पर्यटक और विज्ञानी यहाँ घुमने और अध्ययन के लिए आते हैं। जंगली घोड़ा और वुड डक इस पार्क के मुख्य आकर्षण है।
देहांग: देबांग बायोस्फियर रिज़र्व भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में सन १९९८ में गठित किया गया था, जिसके अन्तर्गत मॉलिंग राष्ट्रीय उद्यान व दिबांग वन्य जीव अभ्यारण्य आते हैं।
कंचनजंगा: सिक्किम में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे १७ जुलाई, २०१६ में यूनेस्को के वैश्विक धरोहरों की सूचि में शामिल कर लिया गया है और यह भारत की सबसे पहली मिश्रित विरासत स्थल है।
कच्छ: गुजरात प्रांत में कच्छ जिले के उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ नमकीन दलदल का वीरान प्रदेश है। इस बायोस्फियर रिज़र्व के अन्तर्गत कच्छ मरुस्थलीय अभ्यारण्य और जंगली गधा अभयारण्य सम्मिलित हैं।
सेशाचलम पर्वत: दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में पूर्वी घाट की पहाड़ी पर्वतमालाओं का एक हिस्सा है। हिन्दू धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल, तिरुपति इन्हीं पहाड़ियों पर स्थित है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान: पन्ना शहर के पास में स्थित है लेकिन यह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का हिस्सा है। यह पार्क राज्य का पांचवा और देश का बाईसवां टाइगर रिजर्व पार्क है। इस पार्क को पर्यटन मंत्रालय के द्वारा सम्मानित किया गया है।
मानस राष्ट्रीय उद्यान: यह उद्यान एक सींग का गैंडा और बारहसिंघा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसे सन १९८५ में वैश्विक धरोहर का दर्जा दिया गया था लेकिन अस्सी के दशक के अंत में बोडो विद्रोही गतिविधियों के कारण १९९२ में वैश्विक धरोहर स्थल की सूची से हटा लिया गया। बाद में फिर से इसे जून २०११ में पुन: यूनेस्को की वैश्विक धरोहर में शामिल कर लिया गया।
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