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तोरणमल महाराष्ट्र के नांदुरबार जिले में स्थित सतपुड़ा पर्वत श्रेणी का एक प्राचीन हिल स्टेशन है। यहाँ की अनछुई और अनजान दृश्य एक खूबसूरत नज़ारे का निर्माण करती है। तोरणमल सतपुड़ा पर्वत श्रेणी का एक भाग है और एक अनजान गन्तव्य स्थल भी। पहले धूले शहर भी नांदुरबार के साथ ही मिला हुआ था, जो बाद में सन १९८८ में इससे अलग हो गया। दिलचस्प बात यह है कि यह एक हिन्दू तीर्थस्थल भी है, जो गोरखनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि पर कई भक्त भक्ति भावना के साथ इस मंदिर के दर्शन करने दूर-दूर से आते हैं। तोरणमल के सुन्दर नज़ारे एक दिन की यात्रा के लिए एक आदर्श जगह है। इस हिल स्टेशन का नाम तोरण वृक्ष के नाम पर पड़ा। किं वदंती है कि तोरणमल शहर में इस तरह के पेड़ इतनी प्रचुर मात्रा में हैं कि स्थानीय आदिवासियों ने वृक्ष का उर्वरता की देवी के रूप में तोरण देवी की पूजा प्रारंभ कर दी। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण तोरणमल में सालभर मौसम शानदार होता है। महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहरों और कस्बों से जुड़े होने के कारण तुरंत छुट्टी मनाने के लिए यह पर्यटन स्थल एक आदर्श स्थान है। सभी ओर से पहाड़ियों से घिरे होने के कारण तोरणमल हिल स्टेशन हरा-भरा है, जिसे पूरे महाराष्ट्र राज्य में दूसरा सबसे ठंडा हिल स्टेशन होने का श्रेय प्राप्त है। यहां आश्चर्य जनक झीलें और सुंदर दर्शनीय स्थान हैं तथा साथ ही साथ चुनौती पूर्ण ट्रेकिंग के रास्ते भी हैं जो किसी भी ट्रेकर को खुश कर देंगे।

क्या देखें:

सीता खाई: सीता खाई का नाम देवी सीता के नाम पर पड़ा। यह अदभुत घाटी तोरणमल से लगभग १.५ किलोमीटर दूर स्थित है। मानसून के दौरान यहां के जलप्रपात अनेक पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और इसे एक महत्वपूर्ण स्थान बनाते हैं। पास ही इको पॉइंट भी देखा जा सकता है।

तोरण देवी मंदिर: तोरण देवी मंदिर छह सौ साल से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर में तोरण देवी की मूर्ति प्रतिस्थापित है। देवी की मूर्ति काले पत्थर से बनी हुई है। यह मंदिर तोरणमल हिल स्टेशन में स्थित है।

फॉरेस्ट पार्क और मेडीसिनल प्लांट गार्डन: फॉरेस्ट पार्क और मेडीसिनल प्लांट गार्डन– जिसे जंगली औषधियों का गार्डन भी कहा जाता है, तोरणमल का वह स्थान है जहां अनेक औषधीय पौधे और झाडियां उपलब्ध हैं।इस स्थान पर प्रत्येक पौधे के औषधीय गुण विभिन्न बीमारियों के इलाज में उपयोगी हैं।

यशवंत झील:


इस झील का नाम महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री यशवंत राव चव्हाण के नाम पर रखा गया है। यह एक प्राकृतिक झील है, जो लगभग १.१६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फ़ैली हुई है। इस स्थान पर आने वाले पर्यटक बोटिंग (नाव की सवारी) का आनंद और पास ही प्रोटेस्टेंट चर्च है जो इस स्थान की सुंदरता और बढ़ा देता है।

आवशाभारी पॉइंट: आवशाभारी पॉइंट शानदार स्थान है जो आस-पास के पहाड़ों और फॉरेस्ट रेस्ट हाउस (जंगल विश्राम गृह) का एक विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। पास स्थित जलिन्द्रनाथ मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल है। आस-पास के क्षेत्र में गोंड राजा का किला है तथा इतिहास के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक आकर्षण का स्थान है।

खड़की पॉइंट: आवशाभारी पॉइंट की तरह खड़की पॉइंट भी तोरणमल का एक प्रसिद्ध स्थान है। ऐसा विश्वास है कि सदियों पहले इस हिल स्टेशन की लंबाई के साथ एक विशाल दीवार थी,जिसके अवशेष इस स्थान की खुदाई के दौरान पाए गए थे।

लोटस झील: लोटस झील को स्थानीय रूप से कमल तलाव के नाम से जाना जाता है। झील में प्रचुर मात्रा में कमल के फूल हैं, जो इस जगह की सुंदरता को बढ़ाते हैं।

मछिन्द्रनाथ गुफा: ऐसा विश्वास है कि मछिन्द्रनाथ गुफा का नाम संत मछिन्द्रनाथ के नाम पर पड़ा था। तोरणमल में स्थित यह गुफा प्राकृतिक रूप से बनी हुई है। मछिन्द्रनाथ मंदिर और मार्केंडेय ऋषि के बैठने का स्थान, दो अन्य आकर्षण हैं जिन्हें अवश्य देखना चाहिए।

शाहदा: तोरणमल से १४ किलोमीटर दूर छोटा-सा नगर शाहदा एक पुरातात्विक स्थल है। यह एक धार्मिक स्थल है,जिसे दक्षिण काशी के नाम से भी जाना जाता है। पांडव लेनी गुफ़ा या पाँच पांडव परिसर शाहदा के निकट ही स्थित है।

जलवायु: मॉनसून के समय तोरणमल की खूबसूरती देखने लायक होती है। चारों तरफ से हरियाली और पानी के झरनों से घिरी हुई। गर्मी के मौसम में यहाँ का जलवायु राहत भरा सुखद अनुभव कराता है। इसी वजह से यह गर्मियों के दिनों में भी यात्रा के लिए एक आदर्श जगह है। ठण्ड का मौसम भी यहाँ की यात्रा के लिए एक अच्छा समय है, जहाँ आप ठण्ड और शांत वातारण का भरपूर मज़ा ले पाएंगे।

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