*भावविभोर हो नाचने लगा सबका मन-मयुर, जब घाटकोपर के सुधा पार्क के प्रांगण में बरसी भक्ति रसधारा*
*मुंबई/गोडवाड ज्योती:* श्री सुधा पार्क जैन संघ में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के छठवें दिवस *संगीत सम्राट बिपीनजी पोरवाल व मंच संचालक भरत एन. कोठारी* की युगलबंदी ने लय-सुर-ताल के त्रिवेणी संगम के साथ वहां उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं को अनोखी भक्ति रसधारा की अप्रतिम व अविस्मरणीय बौछारों से सराबोर कर दिया।भक्ति का आलम यह था कि शंखेश्वर पार्श्व दादा के भक्त इन बौछारों में जितना भीग रहे थे, उतनी ही प्यास बढ़ती जा रही थी। यानि भक्तो की फरमाइशों का अलग ही माहौल था।
हालांकि विख्यात संगीतकार बिपीनजी पोरवाल की सेहत व गला सुबह से ही साथ देने के लिए मना कर रहा था लेकिन उन्होंने साबित कर दिखाया कि जब बात आत्मा से परमात्मा के मिलन की हो तो रास्ते की रूकावटें खुद-ब-खुद रास्ते से हटकर मंजिलों का पता स्वयं बताती है। उनके एक गीत के बोल *प्रभु जब दूर होता है तो पास लगता है और जब पास होता है तो खास लगता है..* ने सचमुच प्रभु की साक्षात अनुभूति करवा दी और सबको यह प्रतित होने लगा कि वे महाविदेह क्षेत्र में हैं। साथ ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी भरतजी कोठारी ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए सभी के दिलों पर अपनी अमिट स्वर्णिम छाप अंकित कर दी। कार्यक्रम पश्चात चढावो के किर्तीमान को ध्वस्त और नव इतिहास की रचना करते हुए आरती का लाभ प्रभु सेवा करने वाले पुजारीजी को प्रदान कर सभी संघों के लिए अनुमोदनिय कार्य के आगाज की नींव स्थापित की गई। कार्यक्रम में सुधा पार्क ट्रस्ट मंडल व ट्रस्टी जीतु भाई का सहयोग रहा एवं श्रीसंघ ने इस युगल जोड़ी प्रभावित हो कर अगले वर्ष पर्युषण के दौरान आंठों दिन भक्ति करने का आमंत्रण दिया है।
*गोडवाड ज्योती*

*मुंबई/गोडवाड ज्योती:* श्री सुधा पार्क जैन संघ में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के छठवें दिवस *संगीत सम्राट बिपीनजी पोरवाल व मंच संचालक भरत एन. कोठारी* की युगलबंदी ने लय-सुर-ताल के त्रिवेणी संगम के साथ वहां उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं को अनोखी भक्ति रसधारा की अप्रतिम व अविस्मरणीय बौछारों से सराबोर कर दिया।भक्ति का आलम यह था कि शंखेश्वर पार्श्व दादा के भक्त इन बौछारों में जितना भीग रहे थे, उतनी ही प्यास बढ़ती जा रही थी। यानि भक्तो की फरमाइशों का अलग ही माहौल था।
हालांकि विख्यात संगीतकार बिपीनजी पोरवाल की सेहत व गला सुबह से ही साथ देने के लिए मना कर रहा था लेकिन उन्होंने साबित कर दिखाया कि जब बात आत्मा से परमात्मा के मिलन की हो तो रास्ते की रूकावटें खुद-ब-खुद रास्ते से हटकर मंजिलों का पता स्वयं बताती है। उनके एक गीत के बोल *प्रभु जब दूर होता है तो पास लगता है और जब पास होता है तो खास लगता है..* ने सचमुच प्रभु की साक्षात अनुभूति करवा दी और सबको यह प्रतित होने लगा कि वे महाविदेह क्षेत्र में हैं। साथ ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी भरतजी कोठारी ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए सभी के दिलों पर अपनी अमिट स्वर्णिम छाप अंकित कर दी। कार्यक्रम पश्चात चढावो के किर्तीमान को ध्वस्त और नव इतिहास की रचना करते हुए आरती का लाभ प्रभु सेवा करने वाले पुजारीजी को प्रदान कर सभी संघों के लिए अनुमोदनिय कार्य के आगाज की नींव स्थापित की गई। कार्यक्रम में सुधा पार्क ट्रस्ट मंडल व ट्रस्टी जीतु भाई का सहयोग रहा एवं श्रीसंघ ने इस युगल जोड़ी प्रभावित हो कर अगले वर्ष पर्युषण के दौरान आंठों दिन भक्ति करने का आमंत्रण दिया है।
*गोडवाड ज्योती*

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