रफ्तार कम होने से बड़ा हादसा टला...
- ट्रेन 11448 हावड़ा-जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस ने ओबरा केबिन सुबह 6.13 पर पार किया था, तभी 2 जनरल बोगी, 3 एसी, 1 पार्सल बाेगी और इंजन पटरी से उतर गए। इस ट्रेन में कुल 21 डिब्बे थे।
- सोनभद्र के कलेक्टर प्रमोद कुमार ने कहा कि पटरी में कोई समस्या रही होगी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ, मामले की जांच कराई जा रही है।
- बताया जा रहा है कि ट्रेन की रफ्तार कम थी इसलिए बड़ा हादसा होने से टल गया।
- इंडियन रेलवे के पीआरओ ने बताया कि डिरेल हुए डिब्बों में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और उन्हें ट्रेन के दूसरे डिब्बों में शिफ्ट किया गया।
- ट्रैक की खराब हालत पर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा हमने सुरक्षा, पटरियों के बदलने और उनके रखरखाव से संबंधित काम के लिए फंड बढ़ाया है।
- उधर, मथुरा-कानपुर रेल ट्रैक पर फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ के बीच भी 3 इंच पटरी टूटी मिली। स्थानीय लोगों लाल कपड़ा दिखाकर कालिंदी एक्सप्रेस को रोका।
- ट्रेन 11448 हावड़ा-जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस ने ओबरा केबिन सुबह 6.13 पर पार किया था, तभी 2 जनरल बोगी, 3 एसी, 1 पार्सल बाेगी और इंजन पटरी से उतर गए। इस ट्रेन में कुल 21 डिब्बे थे।
- सोनभद्र के कलेक्टर प्रमोद कुमार ने कहा कि पटरी में कोई समस्या रही होगी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ, मामले की जांच कराई जा रही है।
- बताया जा रहा है कि ट्रेन की रफ्तार कम थी इसलिए बड़ा हादसा होने से टल गया।
- इंडियन रेलवे के पीआरओ ने बताया कि डिरेल हुए डिब्बों में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और उन्हें ट्रेन के दूसरे डिब्बों में शिफ्ट किया गया।
- ट्रैक की खराब हालत पर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा हमने सुरक्षा, पटरियों के बदलने और उनके रखरखाव से संबंधित काम के लिए फंड बढ़ाया है।
- उधर, मथुरा-कानपुर रेल ट्रैक पर फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ के बीच भी 3 इंच पटरी टूटी मिली। स्थानीय लोगों लाल कपड़ा दिखाकर कालिंदी एक्सप्रेस को रोका।
मुजफ्फरनगर हादसे पर 4 अफसरों को किया था सस्पेंड
- मुजफ्फरनगर रेल हादसे के एक दिन बाद ही रेलवे मिनिस्ट्री ने सख्त कार्रवाई की थी।
- DRM दिल्ली, GM नॉर्दन रेलवे और इंजीनियरिंग विंग के सीनियर अफसर को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इसके अलावा चार अफसरों को सस्पेंड किया गया है।
- चीफ ट्रैक इंजीनियर का ट्रांसफर कर दिया गया है। शुरुआती जांच के बाद रेलवे ने लापरवाही बरते जाने के संकेत दिए थे।
महाराष्ट्र में दुरंतों हुई थी डिरेल
- हाल ही में महाराष्ट्र के टिटवाला में भी रेल हादसा हुआ था। वहां नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस का इंजन और 9 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस ट्रेन में कुल 18 डिब्बे थे।
- यह हादसा उस वक्त हुआ जब ज्यादातर यात्री सो रहे थे। महाराष्ट्र के वासिंद और आसनगांव स्टेशनों के बीच सुबह 8.36 बजे हुए इस हादसे की पीछे लैंडस्लाइड को जिम्मेदार बताया गया था।
40% रेलवे ट्रैक आउट डेटेड
रेलवे के रिटायर्ड अधिकारियों ने बताया कि, रेलवे में भारी संख्या में वर्कर्स की कमी है। वहीं, आउट डेटेड मैटेरियल से काम चलाया जा रहा है, जिस वजह से ये हादसे हो रहे हैं।
- रिटायर्ड अधिकारी और नॉर्दन रेलवे मेन्स यूनियन (एनआरएमयू) के प्रेसिडेंट एसके त्यागी ने बताया कि, ''रेल होदसों का सबसे बड़ा कारण ये है कि हमारे 40 प्रतिशत ट्रैक आउट डेटेड हैं। इसके अलावा कई रूट ऐसे हैं जिनके ट्रैक अक्सर खराब रहते हैं। इन ट्रैक्स को मेंटेन कराकर चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं ट्रैक को सुबह और शाम जांच का नियम है। लेकिन मैन पावर की कमी की वजह से ये जांच भी नहीं हो पा रही। ऐसे में हादसे तो होंगे ही।''
- ''ये बातें सारे अधिकारी जानते हैं, फिर चाहे वो मैनेजमेंट हो या निचले स्तर पर काम कर रहे डीआरएम या अन्य कर्मी। कोई पॉलिसी भी बनती है तो वो फाइल इतनी जगह से घूमती है कि दोबारा मिलती ही नहीं। बस कागजों पर सारी चीजें दी जा रही हैं।''
UP में डेढ़ साल में हुए बड़े रेल हादसे
1) 20 फरवरी 2017: कालिन्दी एक्सप्रेस के टुंडला में 12 डिब्बे पटरी से उतरे। 23 की मौत
2) 20 नवंबर 2016: कानपुर के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसा। 121 लोगों की मौत।
3) 20 मार्च 2015: रायबरेली के बछरावां के पास देहरादून-वाराणसी एक्सप्रेस हादसा। 32 की मौत।
4) 1 अक्टूबर 2014: गोरखपुर में क्रासिंग पर दो ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर। 14 की मौत।





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