32 लाख टैक्सपेयर्स में से 70% को चुकाना है 1-30 हजार रु. टैक्स...
- बाकी 32 लाख में बड़ी तादाद में ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें नकद जीएसटी नहीं भरना है। दरअसल, इन कारोबारियों ने उस राशि से टैक्स भुगतान का ऑप्शन चुना है, जो वे 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने से पहले सर्विस टैक्स या एक्साइज ड्यूटी के तौर पर जमा कर चुके थे।
- सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 32 लाख टैक्सपेयर्स में से 70 फीसदी ऐसे हैं जिन्हें एक रुपए से 33 हजार रुपए तक टैक्स भुगतान करना है। महज 0.3 फीसदी या 10 हजार ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने जुलाई में कुल टैक्स कलेक्शन का दो तिहाई हिस्सा चुकाया है। सरकार के मुताबिक जुलाई में टैक्स के तौर पर 94 हजार करोड़ रुपए जुटाए गए।
जेटली ने क्या कहा था?
- फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा था कि अभी तक जीएसटीएन पर करीब एक करोड़ कारोबारी और सर्विस प्रोवाइडर्स ने खुद को रजिस्टर कराया है। इनमें 72 लाख लोग एक्साइज, वैट और सर्विस टैक्स चुकाते थे और अब जीएसटी के तहत उन्होंने खुद को रजिस्टर करा लिया है। वहीं, करीब 25 लाख नए टैक्सपेयर्स भी जुड़े हैं। इसके अलावा तकरीबन 95 फीसदी टैक्स कलेक्शन ऐसे करदाताओं से होता है जो 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करते हैं।
क्या कहते हैं आर्थिक मामलों के EXPERT...
- दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और आर्थिक मामलों के एक्सपर्ट आलोक पुराणिक का कहना है कि हर कोई टैक्स में छूट चाहता है। सरकार जीएसटी लगाती है तो भी उसे आलोचनाएं झेलनी पड़ती हैं और उसमें राहत देती है तो भी लोग निशाना साध रहे हैं।
- पुराणिक ने कहा, 'पहले बड़ी तादाद में लोग या तो टैक्स के दायरे से बाहर थे या आसानी से टैक्स की चोरी कर लेते थे। अब उन्हें भी टैक्स चुकाना पड़ रहा है। इसलिए हर कोई परेशान नजर आ रहा है।'
- 'शुक्रवार को जेटली ने कहा भी है कि जैसे-जैसे रेवेन्यू बढ़ेगा, समय-समय पर जरूरत के मुताबिक दरों को कम किया जाता रहेगा।
- पुराणिक ने बताया कि जब उन्होंने कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से बात की तो उनका कहना था, 'पहले लोग एक करोड़ का कारोबार करते थे और 10 लाख का दिखाते थे। बाकी का 90 लाख का कारोबार अन-अकाउंटेड रहता था।'
- 'अब नई व्यवस्था में कारोबारियों को यही छूट नहीं मिल पा रही है। जीएसटी लागू होने का असर बिजनेस या बिजनेसमैन पर नहीं है क्योंकि आखिर में इस सब का भार कंज्यूमर को ही भुगतना होता है, जबकि देखने वाली बात ये है कि कंज्यूमर सड़क पर नहीं है। सिर्फ राजनीति हो रही है।
- 'हालांकि, हल्ला मचाना भी गलत नहीं है, लेकिन इसके साथ ही लोगों को अपने कारोबार को साफ करना होगा। साथ ही सरकार को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि सिर्फ कंज्यूमर पर ही सारा लोड न पड़े।'
- बाकी 32 लाख में बड़ी तादाद में ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें नकद जीएसटी नहीं भरना है। दरअसल, इन कारोबारियों ने उस राशि से टैक्स भुगतान का ऑप्शन चुना है, जो वे 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने से पहले सर्विस टैक्स या एक्साइज ड्यूटी के तौर पर जमा कर चुके थे।
- सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 32 लाख टैक्सपेयर्स में से 70 फीसदी ऐसे हैं जिन्हें एक रुपए से 33 हजार रुपए तक टैक्स भुगतान करना है। महज 0.3 फीसदी या 10 हजार ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने जुलाई में कुल टैक्स कलेक्शन का दो तिहाई हिस्सा चुकाया है। सरकार के मुताबिक जुलाई में टैक्स के तौर पर 94 हजार करोड़ रुपए जुटाए गए।
जेटली ने क्या कहा था?
- फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा था कि अभी तक जीएसटीएन पर करीब एक करोड़ कारोबारी और सर्विस प्रोवाइडर्स ने खुद को रजिस्टर कराया है। इनमें 72 लाख लोग एक्साइज, वैट और सर्विस टैक्स चुकाते थे और अब जीएसटी के तहत उन्होंने खुद को रजिस्टर करा लिया है। वहीं, करीब 25 लाख नए टैक्सपेयर्स भी जुड़े हैं। इसके अलावा तकरीबन 95 फीसदी टैक्स कलेक्शन ऐसे करदाताओं से होता है जो 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करते हैं।
क्या कहते हैं आर्थिक मामलों के EXPERT...
- दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और आर्थिक मामलों के एक्सपर्ट आलोक पुराणिक का कहना है कि हर कोई टैक्स में छूट चाहता है। सरकार जीएसटी लगाती है तो भी उसे आलोचनाएं झेलनी पड़ती हैं और उसमें राहत देती है तो भी लोग निशाना साध रहे हैं।
- पुराणिक ने कहा, 'पहले बड़ी तादाद में लोग या तो टैक्स के दायरे से बाहर थे या आसानी से टैक्स की चोरी कर लेते थे। अब उन्हें भी टैक्स चुकाना पड़ रहा है। इसलिए हर कोई परेशान नजर आ रहा है।'
- 'शुक्रवार को जेटली ने कहा भी है कि जैसे-जैसे रेवेन्यू बढ़ेगा, समय-समय पर जरूरत के मुताबिक दरों को कम किया जाता रहेगा।
- पुराणिक ने बताया कि जब उन्होंने कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से बात की तो उनका कहना था, 'पहले लोग एक करोड़ का कारोबार करते थे और 10 लाख का दिखाते थे। बाकी का 90 लाख का कारोबार अन-अकाउंटेड रहता था।'
- 'अब नई व्यवस्था में कारोबारियों को यही छूट नहीं मिल पा रही है। जीएसटी लागू होने का असर बिजनेस या बिजनेसमैन पर नहीं है क्योंकि आखिर में इस सब का भार कंज्यूमर को ही भुगतना होता है, जबकि देखने वाली बात ये है कि कंज्यूमर सड़क पर नहीं है। सिर्फ राजनीति हो रही है।
- 'हालांकि, हल्ला मचाना भी गलत नहीं है, लेकिन इसके साथ ही लोगों को अपने कारोबार को साफ करना होगा। साथ ही सरकार को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि सिर्फ कंज्यूमर पर ही सारा लोड न पड़े।'

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