परिवार पर टूटा दुःख का पहाड़
मुलाराम चार बेटे व एक बेटी के पिता थे। और चार बेटे विंजाराम, भंवरलाल, श्रवण, बाबुलाल और पुत्री - लक्ष्मी है। मुलाराम मजदूरी का कार्य करते थे। और उनकी पत्नी फाउडी देवी गृहिणी थी। वहीं इस तरह से घटना होने से परिवार का दुःख का पहाड़ टुट गया। वहीं मुलाराम का शोक संदेश जैतपुरा गांव में पंहुचा तो उनके परिवार व रिश्तेदारों के आंखो से आंसूओं गिरना व रोना शुरू हो गया। मगर आज परिवार की आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नहीं है।
घर से ढोला का कहकर निकले थे और गये पाली
मुलाराम घर से सुबह मजदूरी करने के लिए निकले तो परिवार वालों को कहा की में ढोला काम पर जा रहा हुं। परन्तु वह किसी कार्य के कारण पाली चले गये थे। और वापस पाली से जैतपुरा की लौट रहे थे तब हाथलाई बस स्टैण्ड पर ही मौत हो गई।
हेलमेट होता तो शायद जान बस जाती
यदि मुलाराम के सिर पर हेलमेट पहना हुआ होता तो शायद उसकी जान बस जाती। और लापरवाही के कारण हेलमेट पहना हुआ नहीं होने के कारण हादसे में सबसे ज्यादा सिर में लगने से मौत होने का कारण हैं।

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