तेरापंथ धर्मसंघ व मर्यादा महोत्सव पर एक नजर ....👍
तेरापंथ धर्मसंघ में एक ऐसा पर्व जिसकी महत्ता अवर्णिनीय है । इस पर्व की एक अलग पहचान है । जैन धर्म मे अनेक पंथ व सम्प्रदाय है मगर एक ऐसा पंथ जिसमे एक गुरु एक विधान की परंपरा एक ऐसा अनुशासन का अनूठा उदाहरण है । जो वर्तमान में हमे बिरले ही नजर आते है ।
भारतीय संस्कृति में दो प्रकार की पद्धतियों का प्रचलन है एक है श्रमण संस्कृति दूसरी है वैदिक संस्कृति !
दोनों ही संस्कृतियों में अनेक पर्व उत्सव मनाए जाते हैं क्योंकि इन उत्सवों के माध्यम से व्यक्ति अपने उत्साह की अभिव्यक्ति तो करते ही हैं साथ ही साथ एक नई सोच नए विचारों नई स्फुरणा को जन्म देते हैं उत्सवों के माध्यम से सृजनात्मक व रचनात्मक शक्ति का प्रस्फुटन भी होता है जैन समाज का एक छोटा सा तेरापंथ धर्मसंघ अपनी अनूठी सोच व मर्यादित कार्य प्रणाली के कारण अग्रणी है तेरापंथ शब्द के पीछे जुड़ा है आचार्य भिक्षु का बलिदान व तपोमय जीवन संसार में चल रहे और अनैतिकता के माहौल में नैतिकता की दीप प्रज्वलित करने वाले लौह पुरुष आचार्य भिक्षु ने अपने प्रतिभा ज्ञान के द्वारा तेरापंथ को उन्मुक्त आकाश में विचरण करने की अनोखी शक्ति प्रदान की सत्य बोध की प्रवृत्ति में निरंतर गतिशील चरण है तेरापंथ धर्मसंघ अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला है तेरापंथ धर्मसंघ आचार्य विहार की शुद्धि की मूलभित्ति है तेरापंथ आचार्य भिक्षु ने अपने धर्म संघ की एकता और पवित्रता बनाए रखने के लिए कर्तव्य अकर्तव्य विधि- निवेश की सीमा स्थापित की जिसे मर्यादा नाम से जाना जाता है उनके द्वारा निर्मित अंतिम मर्यादा संवाद 1859 माघ्शुक्ला सप्तमी को हुई
प्रश्न यह मर्यादा महोत्सव क्या है? मनुष्य ने जबसे समूह में रहना सीखा उसने नियंत्रण अनुशासन और सीमा रेखाओं का भी निर्माण किया जैसे-जैसे उसने विकास की दिशा में चरण न्यास किया उन सीमाओं मर्यादाओं की उपयोगिता अधिक समझ में आने लगी परिवार हो या समाज ,राजनीति हो या धर्मनीति , जाति समुदाय हो या धार्मिक संगठन अनुशासन मर्यादा के खाद पानी के बिना उनके पनपने और फलने-फूलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की एक समाज दूसरे समाज की एवं एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र की स्वतंत्रता ना छीने इसी का नाम है मर्यादा इन्हीं मर्यादाओं को सुदृढ़ बनाने और इनको हर वर्ष दोहराने के उद्देश्य से मर्यादा महोत्सव का आयोजन किया जाता है मर्यादा महोत्सव तेरापंथ धर्मसंघ का दुनिया का अनूठा उत्सव व पर्व है तेरापंथ धर्मसंघ की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा यह पर्व अलौकिक पर्व नहीं है सिर्फ सामूहिक सामुदायिक चेतना के अभ्युत्थान कि योजना में धर्म संघ का दिल और दिमाग नए आदर्शों को अनुशासन से जोड़ता है पूरे धर्मसंघ की आचार्य द्वारा सारणा वारणा की जाती है मर्यादा महोत्सव का एक अति भव्य नयनाभिराम या रोमांचक दृश्य होता है बड़ी हाजिरी का उसमें सब साधु-साध्वियों दीक्षा कर्म से पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं और संविधान पत्रिका का समवेत स्वर में उच्चारण करते हैं इस हाजिरी में आचार्य केंद्र में रहते हैं उनको तथा विराट धर्म परिषद को घेरकर वलीमा बिखेरती वृत्ताकार व कथा ऐसी लगती है मानव धर्म और अध्यात्म के सुरक्षा प्रहरी श्वेत सैनिकों ने संपूर्ण आत्मविश्वास के साथ अपना मोर्चा संभाल लिया है तेरापंथ धर्म संघ का मर्यादा महोत्सव मात्र मेला ही नहीं है सैकड़ों प्रबुद्ध साधु शादियों का मिलन की अनूठी घटना है यह मात्र आयोजनात्मक ही नहीं संघ के फलक पर सृजनशीलता के नए अभिलेख अंकित करता है राष्ट्र की वर्तमान परिस्थितियों में फैलता वैचारिक प्रदूषण आर्थिक अपराधीकरण रीति रिवाजों में पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण धार्मिक संस्कृत संस्कारों से कटती युवा पीढ़ी का रवैया समाज में बढ़ता सत्ता प्रतिष्ठा और पैसे का अंधाधुन आकर्षण जैसे जीवन संदर्भों के साथ किसी भी कीमत पर समझौता ना कर हम सब समझ के साथ संस्कृति को योग्य क्षेम देने का संकल्प करें तभी मर्यादा महोत्सव संघ को बुनियाद पर समाज और राष्ट्र को नई प्रतिष्ठा नई दिशा दे सकेगा
लेखक - उत्तम जैन ( विद्रोही)
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तेरापंथ धर्मसंघ व मर्यादा महोत्सव पर एक नजर ....👍
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