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मेवानगर। नाकोड़ाजी तीर्थ आम तौर पर अपनी महिमा, गरिमा और धार्मिक गौरव के रुप में हम सब के दिलों में प्रतिष्ठित रहा है। लेकिन अब इस तीर्थ कमेटी की प्रतिष्ठा दांव पर है। जिस तरह से जैन धर्म के विख्यात तीर्थ स्थल नाकोडाजी मंदिर संचालन समिति के चुनाव की प्रक्रिया में चुनाव जितने के लिए लोग जो हथकंडे अपना रहे है, उसकी समाज में इन दिनों काफी चर्चा है।

मारवाड़ से लेकर मुंबई और बालोतरा से लेकर बैंगलुरु तक सब जगह नाकोड़ाजी कमेटी के चुनाव के बारे में चर्चा आम है। कुछ साल पहले तक इस तीर्थ की प्रबंधन समिति के चुनाव बहुत शांतिपूर्ण प्रक्रिया से संपन्न होते थे एवं चुनाव होने के बाद ही लोगों पता चलता था कि चुनाव हो गये लेकिन अब साल भर पहले से लोग चुनाव लडऩे की तैयारी में अपना प्रचार करते एवं अपनी लॉबी तैयार करते हुए देखे जा सकते है। धार्मिक संस्थाओं में काम करना हमारी सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। लेकिन वह परंपरा अगर विकृत तरिके से अपना स्वरुप बदल ले तो उस पर चिंता जायज है। देश भर का जैन समाज आज नाकोड़ाजी के चुनावी घमासान की इसिलिए चर्चा कर रहा है, क्योंकि लोगों के मन मे नाकोड़ा तीर्थ की गरिमा को बनाए रखने की चिंता है। निश्चित रुप से इस चुनाव में जिस तरह कि स्वयं को नेता बनाने की कोशिशे होती है। और अपने समर्थन में लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए जिस तरह से दूर दूर से लोगों को नाकोड़ाजी ले जाया जाता है। वह अपने आप में कोई गर्व करने योग्य बात नहीं है। पिछले दिनों नाकोडाजी के चुनाव की पर्चीया और कागज बीच सडक़ फाडें गये, जूतमपैजार की नौबत आयी, यहां तक कि पुलिस भी बुलानी पड़ी। यह किसी भी तीर्थ की गरिमा के लिए अच्छी बात नहीं हो सकती। लेकिन इस चुनाव को लेकर सोशल मिडीया पर भी बहुत सामग्री वायरल हुई, जिससे निश्चित रुप से नाकोड़ाजी तीर्थ की गरिमा को ठेस पहुंची हैं।

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