रतलाम । जयन्तसेन धाम में शनिवार को लोकसन्त आचार्य व गच्छाधिपति श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में ज्ञानपंचमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया । इस मौेके पर ज्ञान पूजा का आयोजन हुआ । लोकसन्तश्री ने धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान के बिना कुछ संभव नहीं है । ज्ञानी और अज्ञानी का भेद उसकी रुचि के अनुसार होता है । ज्ञान गुरु से ही प्राप्त होता है । गुरु के माध्यम से मिलने वाला एक शब्द भी मोक्ष के द्वार खोल देता है । सही मायने में ज्ञान ही मोक्ष का द्वार है।
लोकसन्तश्री ने दूर-दूर से आए भक्तों और श्रद्धालुओं को कहा कि ज्ञानी की रुचि सद्गुण प्राप्ति, सद्भाव वृद्धि, समता में स्थिरता और आत्मस्वरुप में लीन रहने की होती है । अज्ञानी हमेशा संसार के सुख और परभावों में रहता है । ज्ञानी ज्ञान में अज्ञानी अज्ञान में मस्त रहता है । प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति का आंकलन उसके देखने, सुनने और बोलने की पसंद के आधार पर हो जाता है । ज्ञान गुरु से मिलता है तो मोक्ष तक ले जाता है लेकिन अधिक ज्ञान अहंकार भी प्रकट कर देता है । दम्भ नहीं करने वाला ही सच्चा ज्ञानी होता है । लोकसन्तश्री की निश्रा में ज्ञानपंचमी पर विशेष प्रवचन हुए। दोपहर में सामूहिक देववन्दन तथा शाम को प्रतिक्रमण किया गया । इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
गुरु के बिना नहीं मिलता है ज्ञान - मुनिराजश्री
मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने विशेष प्रवचन में ज्ञान और गुरु का महत्व बताते हुए कहा कि इतिहास उठाकर देख लो, गुरु के बिना किसी को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है । गुरु नहीं तो ज्ञान नहीं मिलेगा और ज्ञान नहीं होगा तो चारित्र नहीं मिलेगा । चारित्र के बिना मोक्ष नहीं मिलता । ज्ञान के लिए स्वभाव, बुद्धि, विनय, उल्लास, राग, संयोग, उपयोगी ग्रंथ, उचित स्थान, सहअध्यायी और संतुलित आहार का होना आवश्यक है । व्यक्ति स्वस्थ नहीं होगा तो ज्ञान प्राप्ति मन से नहीं कर पाएगा । स्वास्थ्य के साथ बुद्धि होगा, तभी किसी की ऊर्जा का सदुपयोग हो सकता है । विनय नहीं हुआ तो ज्ञान नहीं आएगा, ज्ञान आए तो मन में उल्लास होना भी जरुरी है अन्यथा वह टिक नहीं पाएगा । उल्लास के साथ शान्नें के प्रति राग-भाव भी जरुरी है । बिना राग के पढ़े गए शान्न् गलत ज्ञान भी दे सकते हैं । ज्ञान के लिए राग के साथ गुरु की निकटता, ग्रंथों की उपलब्धता का संयोग भी जरुरी है । यह संयोग हो जाए तो योग्य स्थान होना भी आवश्यक है और साथ में सहअध्यायी रहे तो और अधिक लाभ मिल जाता है। ज्ञान के पीपासु को हमेशा संतुलित आहार करना चाहिए अन्यथा वह कभी अनुकूलता से ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाएगा ।
उन्होंने कहा कि ज्ञानियों को ज्ञान का व्यसन होता है । व्यसन वे सभी कहलाते हैं जो आदत बन जाते हैं । इसके लिए बुराई साथ में होना जरुरी नहीं है। ज्ञान की जिज्ञासा सदैव रखनी चाहिए । विडम्बना है कि आज सच्चा मार्ग बताने वाला ब-मुश्किल मिलता है । चिकित्सक ईलाज बताता है, पहलवान व्यायाम बताता है और दुकानदार सामान बताता है। सच्चा मार्ग केवल परमात्मा ही बताते हैं, वे स्वयं भी इस मार्ग पर चलकर मोक्ष तक पहुंचे और सबको मोक्ष का द्वार खोलने का रास्ता दिखा रहे हैं । इस मौके पर ज्ञान की आरती हुई, जिसका लाभ प्रो. वी.के. जैन परिवार ने लिया ।
‘स्वस्नात्र पूजा’ पुस्तक का विमोचन -
विशेष प्रवचन के दौरान चातुर्मास आयोजक एवं राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप परिवार तथा रतलाम श्रीसंघ की ओर से सिद्धार्थ काश्यप, सिद्धार्थ जैन, सुशील छाजेड, श्रेणिक घोचा, पारस खेडावाला, बाबू भाई धाणसावाला व बसन्त भाई ने लोकसन्तश्री की पुस्तक ‘स्वस्नात्र पूजा’ का विमोचन किया । दादा गुरुदेव की आरती का लाभ राकेश कुमार, शेखर कुमार घोचा परिवार द्वारा लिया गया।
धर्मजागृति यात्रा का आयोजन आज -
लोकसन्तश्री की निश्रा में जयन्तसेन धाम में 6 नवम्बर को मधुकर संस्कार ज्ञानायतन द्वारा धर्मजागृति यात्रा का आयोजन होगा। प्रात: 8.00 बजे अभिषेक, 10.00 बजे ‘पुण्य हो तो ऐसा’ विषय पर विशेष प्रवचन, 2.00 बजे संयम संवेदन सम्मेलन तथा शाम 5.30 बजे संध्या भक्ति का आयोजन होगा । इसमें 8 से 24 वर्ष समूह के बालक-बालिका व युवा शामिल होंगे। 7 नवम्बर को जयन्तसेन धाम में प्रवचन नहीं होंगे । लोकसन्तश्री मुनिमण्डल व साध्वीवृन्द के साथ प्रात: चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन द्वारा संस्थापित अहिंसा ग्राम पहुंचकर हितग्राहियों को आशीर्वचन प्रदान करेंगे । तत्पश्चात् उनकी निश्रा में पोलोग्राउण्ड के समीप बधिर एवं मंदबुद्धि विद्यालय भवन में द्वितीय खण्ड का लोकार्पण समारोह आयोजित होगा । समारोह के बाद काटजू नगर पहुंचेंगे । 8 नवम्बर को जयन्तसेन धाम से कस्तूरबा नगर स्थित नमिनाथ जैन मंदिर की चैत्य परिपाटी का आयोजन किया जाएगा, तत्पश्चात प्रात: 9.30 बजे जयन्तसेन धाम में प्रवचन होंगे । ब्रजेश बोहरा नागदा
लोकसन्तश्री ने दूर-दूर से आए भक्तों और श्रद्धालुओं को कहा कि ज्ञानी की रुचि सद्गुण प्राप्ति, सद्भाव वृद्धि, समता में स्थिरता और आत्मस्वरुप में लीन रहने की होती है । अज्ञानी हमेशा संसार के सुख और परभावों में रहता है । ज्ञानी ज्ञान में अज्ञानी अज्ञान में मस्त रहता है । प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति का आंकलन उसके देखने, सुनने और बोलने की पसंद के आधार पर हो जाता है । ज्ञान गुरु से मिलता है तो मोक्ष तक ले जाता है लेकिन अधिक ज्ञान अहंकार भी प्रकट कर देता है । दम्भ नहीं करने वाला ही सच्चा ज्ञानी होता है । लोकसन्तश्री की निश्रा में ज्ञानपंचमी पर विशेष प्रवचन हुए। दोपहर में सामूहिक देववन्दन तथा शाम को प्रतिक्रमण किया गया । इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
गुरु के बिना नहीं मिलता है ज्ञान - मुनिराजश्री
मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने विशेष प्रवचन में ज्ञान और गुरु का महत्व बताते हुए कहा कि इतिहास उठाकर देख लो, गुरु के बिना किसी को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है । गुरु नहीं तो ज्ञान नहीं मिलेगा और ज्ञान नहीं होगा तो चारित्र नहीं मिलेगा । चारित्र के बिना मोक्ष नहीं मिलता । ज्ञान के लिए स्वभाव, बुद्धि, विनय, उल्लास, राग, संयोग, उपयोगी ग्रंथ, उचित स्थान, सहअध्यायी और संतुलित आहार का होना आवश्यक है । व्यक्ति स्वस्थ नहीं होगा तो ज्ञान प्राप्ति मन से नहीं कर पाएगा । स्वास्थ्य के साथ बुद्धि होगा, तभी किसी की ऊर्जा का सदुपयोग हो सकता है । विनय नहीं हुआ तो ज्ञान नहीं आएगा, ज्ञान आए तो मन में उल्लास होना भी जरुरी है अन्यथा वह टिक नहीं पाएगा । उल्लास के साथ शान्नें के प्रति राग-भाव भी जरुरी है । बिना राग के पढ़े गए शान्न् गलत ज्ञान भी दे सकते हैं । ज्ञान के लिए राग के साथ गुरु की निकटता, ग्रंथों की उपलब्धता का संयोग भी जरुरी है । यह संयोग हो जाए तो योग्य स्थान होना भी आवश्यक है और साथ में सहअध्यायी रहे तो और अधिक लाभ मिल जाता है। ज्ञान के पीपासु को हमेशा संतुलित आहार करना चाहिए अन्यथा वह कभी अनुकूलता से ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाएगा ।
उन्होंने कहा कि ज्ञानियों को ज्ञान का व्यसन होता है । व्यसन वे सभी कहलाते हैं जो आदत बन जाते हैं । इसके लिए बुराई साथ में होना जरुरी नहीं है। ज्ञान की जिज्ञासा सदैव रखनी चाहिए । विडम्बना है कि आज सच्चा मार्ग बताने वाला ब-मुश्किल मिलता है । चिकित्सक ईलाज बताता है, पहलवान व्यायाम बताता है और दुकानदार सामान बताता है। सच्चा मार्ग केवल परमात्मा ही बताते हैं, वे स्वयं भी इस मार्ग पर चलकर मोक्ष तक पहुंचे और सबको मोक्ष का द्वार खोलने का रास्ता दिखा रहे हैं । इस मौके पर ज्ञान की आरती हुई, जिसका लाभ प्रो. वी.के. जैन परिवार ने लिया ।
‘स्वस्नात्र पूजा’ पुस्तक का विमोचन -
विशेष प्रवचन के दौरान चातुर्मास आयोजक एवं राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप परिवार तथा रतलाम श्रीसंघ की ओर से सिद्धार्थ काश्यप, सिद्धार्थ जैन, सुशील छाजेड, श्रेणिक घोचा, पारस खेडावाला, बाबू भाई धाणसावाला व बसन्त भाई ने लोकसन्तश्री की पुस्तक ‘स्वस्नात्र पूजा’ का विमोचन किया । दादा गुरुदेव की आरती का लाभ राकेश कुमार, शेखर कुमार घोचा परिवार द्वारा लिया गया।
धर्मजागृति यात्रा का आयोजन आज -
लोकसन्तश्री की निश्रा में जयन्तसेन धाम में 6 नवम्बर को मधुकर संस्कार ज्ञानायतन द्वारा धर्मजागृति यात्रा का आयोजन होगा। प्रात: 8.00 बजे अभिषेक, 10.00 बजे ‘पुण्य हो तो ऐसा’ विषय पर विशेष प्रवचन, 2.00 बजे संयम संवेदन सम्मेलन तथा शाम 5.30 बजे संध्या भक्ति का आयोजन होगा । इसमें 8 से 24 वर्ष समूह के बालक-बालिका व युवा शामिल होंगे। 7 नवम्बर को जयन्तसेन धाम में प्रवचन नहीं होंगे । लोकसन्तश्री मुनिमण्डल व साध्वीवृन्द के साथ प्रात: चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन द्वारा संस्थापित अहिंसा ग्राम पहुंचकर हितग्राहियों को आशीर्वचन प्रदान करेंगे । तत्पश्चात् उनकी निश्रा में पोलोग्राउण्ड के समीप बधिर एवं मंदबुद्धि विद्यालय भवन में द्वितीय खण्ड का लोकार्पण समारोह आयोजित होगा । समारोह के बाद काटजू नगर पहुंचेंगे । 8 नवम्बर को जयन्तसेन धाम से कस्तूरबा नगर स्थित नमिनाथ जैन मंदिर की चैत्य परिपाटी का आयोजन किया जाएगा, तत्पश्चात प्रात: 9.30 बजे जयन्तसेन धाम में प्रवचन होंगे । ब्रजेश बोहरा नागदा

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