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कैबिनेट ने बुधवार को मध्यम आकार की, बड़ी और एसयूवी कारों पर लगने वाले सेस को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और वैट जैसे इनडायरेक्ट टैक्स खत्म होने के कारण अधिकतर एसयूवी कारों की कीमतें 1.1 लाख से लेकर 3 लाख रुपये तक कम हो गई थीं। सेस बढ़ने से कारों की कीमतें फिर से बढ़ जाएंगी, जिससे कारों की मांग पर असर पड़ना तय है।

जीएसटी काउंसिल ने 5 अगस्त को एसयूवी, मिड-साइज और बड़ी कारों पर लगने वाला सेस बढ़ाने को मंजूरी दे दी थी। इस कैटिगरी वाली कारों के दाम जीएसटी के लागू होने के बाद गिर गए थे। बहरहाल, अब जब कैबिनेट ने सेस बढ़ाने को मंजूरी दे दी, तो जीएसटी मुआवाजा ऐक्ट के अनुच्छेद 8 में संशोधन करना जरूरी हो गया है। संसद के अभी सत्र में न होने के कारण एक अध्यादेश जारी कर दिया गया है। इसलिए, अगले सत्र में सरकार इस अध्यादेश को पारित कराने की कोशिश करेगी।

जीएसटी में कार, तंबाकू, कोयला जैसे वस्तुओं पर सेस लगाया गया था ताकि उन राज्यों को मुआवजा दिया जा सके जिन्हें जीएसटी लागू होने से कुछ घाटा होगा। कारों पर अधिकतम 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया था। राज्य मुआवजा कोष बनाने के लिए कारों पर जीएसटी के अलावा 1 से 15 प्रतिशत सेस लगाया गया था जिसे अब बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाएगा।

एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी के लागू होने के बाद कारों की कीमतों में कमी आई थी। अधिकारी ने बताया कि 9 सितंबर को होनेवाली जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में यह तय होगा कि बढ़ा हुआ सेस कब से लगाया जाएगा। जीएसटी से पहले कारों पर 52 प्रतिशत से लेकर 54.72 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, जो जीएसटी लागू होने के बाद कुल टैक्स 43 प्रतिशत ही रह गया था। अधिकारी ने बताया कि कम टैक्स से होने वाले घाटे की पूर्ति करने के लिए सेस 25 प्रतिशत करना पड़ेगा।

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