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*"लुणावा" की लाड़ली बेटी ने दोहा कतर के भारतीय दूतावास की तीसरी सचिव बनने का गौरव हासिल किया*

बाली 6 जुलाई। पाली जिले के बाली तहसील के *लुणावा गाव* के एक साधारण परिवार के मोहनलाल राठौड़ के घर जन्मी पली बढ़ी जन्मी चन्द्रकांता जैव ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर यूपीएससी सिविल सेवा में 2015 में चुनी गई थी और लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्टशन मसूरी में पशिक्षण लेकर भारत सरकार के अंतर्गत सचिव विदेश मंत्रालय के रूप में दोहा कतर के भारतीय दूतावास की तीसरी सचिव बनने का गौरव हासिल किया।

दोहा कतर के भारतीय दूतावास में तीसरी सचिव के रूप में बाली तहसील के *लुणावा गाव* की बेटी की नियुक्ति से जिले ही नही प्रदेश भी गौरान्वित हुआ है।
बेटी की हुनर और उच्ची सोच के चलते शिक्षक पिता ने बेटी की पढाई में सहयोग करने के लिए शिक्षक पद से तीन वर्ष पूर्व ही सेवानिर्वत लेकर बेटी की होसला अफजाइस कर पढाई और लक्ष्य को आकर्शित करने के गुर सिखाने में लग गए।

चन्द्रकांता जैव का आई ए एस से पूर्व आई बी इंटेलिजेसी ब्यूरो में भी चयन हो गया था परन्तु लक्ष्य आई ए एस था जो सफल हुआ।
चन्द्रकांता जैव की पारम्भिक शिक्षा *लुणावा प्राथमिक विधालय* में हुई उसके बाद बाली के राजकीय बालिका विधालय में दसवी तक शिक्षा प्राप्त की और बाहरवीं तक माध्यमिक विधालय बाली के सरकारी विद्यायल में प्राप्त की उसके बाद चन्द्रकांता जैव कमला नेहरू कॉलेज जोधपुर गुमान सिंह मेमोरियल टिचस ट्रेनिग कॉलेज सुमेरपुर व् इंडीयन इंस्टिट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन नई दिल्ही में अध्धयनरत रही जहा भी अध्धयन किया वहा शिक्षा क्षेत्र में बेहतर पर्दशन से अपनी काबिलियत का लोहा मनवाती रही इस अध्धयन काल के दौरान माता तुलसी देवी दिल्ही तक साथ रही 

चन्द्रकांता जैव का एक भाई दिल्ही में भारत दूर संचार विभाग में इजीनियर के पद पर नियुक्त है।
चन्द्रकांता जैव की सफलता और नियुक्ति को लेकर बाली तहसील मे ख़ुशी का माहोल है तो वही पिता मोहन लाल राठौड़ का मानना है की बेटी को परवरिश में दिये गए अच्छे संस्कारो और मेरे शिक्षक रहते नेक नियति से छात्रो को शिक्षा गुण की बदौलत ईश्वर ने बेटी को बड़े पद तक पहुचा कर मुझे प्रसाद दिया है।

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