- पुलिस ने बताया कि हादसे में बड़ौदा के 402 नक्षत्र फ्लैट नियर तीर्थ रेजीडेंस अमीन पार्क फ्लोट निवासी अमृतलाल मोदी (69), उनकी पत्नी सुमन (63), बेटा अल्केश (37), बहू पीनल (32), पोते वेदांश (4) की मौत हो गई। वहीं, 8 साल की पोती तन्वी गंभीर तौर पर जख्मी हो गई।
- यह परिवार खेंखरे पर बड़ौदा से राजस्थान में घूमने निकला था। दो दिन पहले इन्होंने राजस्थान-गुजरात की सीमा पर स्थित मशहूर अंबाजी मंदिर में दर्शन किए थे।
- इसके बाद जयपुर में एक प्रोग्राम में शामिल हुए थे। जयपुर से यह परिवार रविवार रात को बड़ौदा के लिए रवाना हुआ था।
- बताया जाता है कि कार अल्केश चला रहा था। मानसिंहजी का गुड़ा में नाले के पास उसे नींद की झपकी आने से कार पर काबू नहीं रहा और कार डिवाइडर पर चढ़ गई। इससे कार के आगे से परखच्चे उड़ गए।
पुलिया और डिवाडर के बीच फंस गई थी कार
- हाइवे मोबाइल वैन में गश्त कर रही पुलिस को सोमवार सुबह करीब साढ़े 5 बजे एक गाड़ी ड्राइवर ने हादसे की सूचना दी।
- वे मौके पर पहुंचे तो होंडा सीटी कार पुलिया और डिवाडर के बीच फंसी हुई थी। गाड़ी के कांच से महिला के हाथ बाहर की तरफ लटके हुए थे।
- इसके बाद हाइवे मोबाइल और पुलिस के 7 जवानों ने मशक्कत कर कार से लाशों को निकालने की कोशिश की। हाइवे से गुजरने वाली कुछ गाड़ियों के ड्राइवरों ने भी मदद की।
- इस दौरान कार में पीछे की सीट पर बैठी परिवार की दोनों महिलाओं और भाई-बहन को बाहर निकाला गया। इनमें से एक महिला अौर बच्चे की मौत हो चुकी थी। तन्वी और दूसरी महिला की सांसें चल रही थी।
- इन्हें 108 एंबुलेंस अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कल्पेश की पत्नी पीनल ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। पीनल बड़ौदा के पास स्कूल में पढ़ाती थी।
- गाड़ी के आगे से परखच्चे पूरी तरह उड़ चुके थे। गैस कटर से करीब एक घंटे की मशक्कत से कार के आगे वाले दोनों गेट को काटकर कार चला रहे कल्पेश और उसके पिता अमृतलाल को बाहर निकाला, लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे।
- चारों लाशों को एंबुलेंस से मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने मृतका के मोबाइल से परिजनों को फोन कर घटना की जानकारी दी।





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