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साण्डेराव । मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज सामुहिक विवाह समिति देवगढ़-मदारियां क्षेत्र की एक दिवसीय आम जनरल बैठक रविवार को चामुंडा माता मंदिर परिसर आमेट मे समिति अध्यक्ष कैलाश मेवाडा की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई ।बैठक मे समाज बंधुओ के साथ बड़ी संख्या मे युवाओ ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया । बैठक मे सामुहिक विवाह मे समाज के विभिन्न भामाशाहो से सहयोग के लिए सुरत अहमदाबाद बदौडा मे जाने के लिए एक पन्द्रह सदस्यो की टीम गठित की गई जो 5 दिसबंर को आमेट से अध्यक्ष कैलाश मेवाडा के साथ रवाना होकर गुजरात मे सभी समाज बंधुओ से सम्पर्क करेंगे । बैठक मे इस सामुहिक विवाह सम्मेलन मे मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज के ही विवाह योग्य जोडे लेने का फैसला लिया गया है साथ ही महोत्सव मे पुनर्विवाह के जोड़े किसी भी सूरत मे नही लेने का भी निर्णय लिया गया।

अब तक इस सम्मेलन के लिए 15 जोडो का पंजीयन हो चुका है तथा 31 दिसंबर तक ही अंतिम जोडो का पंजीयन किया जाएगा यह बात भी सर्व सहमति से तय की गई है । देवगढ मदारिया क्षैत्र मे यह दुसरा सामुहिक विवाह समारोह होने जा रहा है जिसके लिए समिति की ओर से अलग अलग कमेटीयो का गठन कर उन्हे अपनी जिम्मेदारी सौप दी गई है ।सामुहिक विवाह समारोह के दौरान कोई भी कार्यकर्ता किसी भी प्रकार का नशा पता नही करेगा अगर कोई भी व्यक्ति महोत्सव के दौरान नशे पते मे पाया गया तो वह समाज का गुनेगार होगा तथा सामुहिक विवाह समिति उस पर 21 हजार रुपये का दण्ड करेगी। यह फैसला भी सभी ने एक साथ मिलकर लिया है ।

बैठक मे रमेश कलाल अहमदाबाद, मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज के प्रचारक नटवर मेवाडा साण्डेराव, रमेश मेवाडा काकरोली, दुदाराम दिवेर, अशोक कुमार नरदासकागुडा, देवीलाल सरादारगढ, मनोहर मेवाडा आमेट, जीवनलाल आमेट, पिंटूमेवाडा आमेट, शांतिलाल आमेट टीकमचंद, बंशीलाल, जगदीश मेवाडा, महेन्द्र मेवाडा सहित बड़ी संख्या में समाज बंधुओ ने भाग लिया। इस सामुहिक विवाह को एक ऐतिहासिक यादगार बनाने को लेकर मेवाड, मारवाड-गोडवाड, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित क्षेत्र के परगना अध्यक्षो के साथ भामाशाह तैयारियों में जुटे हुए है।

*महंगाई के दौर में महज एक रूपए में परिणय सुत्र में बंधेगी लाडो:-* बेटा हो या बेटी शादी का खर्च महज एक रूपए। यह पढकर आप चौक गए होगे, लेकिन यह सच है। मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज का 17 फरवरी 2018 को आमेट में सामुहिक विवाह होने जा रहा है। यहां विवाह बंधन मे बंधने वाले वर-वधु के पक्ष से पंजीयन राशी के रूप में महज एक रूपया की राशी ली जा रही हैं। बाकी सभी खर्चा आयोजन समिति व समाज के भामाशाहों के सहयोग से वहन करेगी। महंगाई के इस दौर में बेटी का हाथ पीला करना पिता के लिए किसी जंग जितने से कम नही है।

मेहमानो की आवभगत, विवाह स्थल का किराया, टेंट, भोजन के साथ अन्य व्यवस्थाओं में लाखों रूपए खर्च होते है और परिवार के लोग शादी का आनंद लेने की बजाय व्यवस्थाओं में इधर-उधर दौडते नजर आते है। कई परिवारों को तो विवाह का खर्चा वहन करने के लिए कर्ज लेना पडता है। इसे देखते हुए मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज की और से 1992 में प्रथम सामुहिक विवाह की शुरूआत जोधपुर से की गई थी जिसमें 11 जोडे परिणय सुत्र में बंधे थे। इस विवाह से प्रेरित होकर अन्य जाति समुदाय के लोगो ने भी सामुहिक विवाह अपनाया। प्रवक्ता नटवरलाल मेवाडा साण्डेराव ने बताया कि समाज के भामाशाहों के सहयोग से विवाह बंधन में बंधने वाले प्रत्येक जोडे को समिति गृहस्थ जीवन शुरू करने के लिए आवश्यक साम्रगी, बर्तन, गहने सहित अन्य वस्तुए उपहार में देती है।

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