पुणे : जय जिनेंद्र सेवा संघ पुणे द्वारा आगामी आयोजन, श्री भिलडीयाजी से शंखेश्वर छ: री पालित संघ का मुहूर्त व निश्रा प्रदान की घोषणा करते हुये सांतलपुर में प.पू कच्छवागड समुदाय के गच्छाधिपति आ. श्री कलाप्रभसूरिश्वरजी म.सा. व पू.आ.श्री कल्पतरुसूरिजी म.सा.** वि.सं.2075 पौष वदि 4 (मारवाड़ी ) दि. 26 दिसम्बर 2018 को भीलडीयाजी तीर्थ से प्रस्थान एवँ पौष वदि 13 गुरुवार दि. 3 जनवरी 2019 को शंखेश्वर तीर्थ में मंगल प्रवेश व संघमाल|
गुरुदेव श्री ने स्वगच्छ के 9 आचार्य , 50-60 साधु भगवंत , एवँ 200-250 साध्वीजी भगवंत के सह आगामी संघ में निश्रा प्रदान की विशाल समारोह में धोषणा की |
इस अवसर पर संघ के मुख्य लाभार्थि श्री भागचंदजी हिम्मतमलजी सपत्नीक, धणा निवासी / पुणे , संघ सहयोगी श्री किरणजी चोपड़ा- बाली, श्री गजराजजी नागोरी-चाणोद, श्री भागचंदजी राणावत- बिजोवा, श्री सुनिलजी गुदेंचा- रामचिण, श्री जितेंद्र गुगले- सांगवी पुणे, श्री प्रकाश गहलौत एवँ संघठन संस्थापक अध्यक्ष विमल संघवी की विंनती सह उपस्थिति रही , 9 दिवसीय यह संघ 500 वर्ष प्राचीन शैली पर आधारित रहेगा , आचार्य के गुण अनुरूप 36 झौंपड़ी नुमा घर, साधु के गुण अनुरूप 27 लोगों के रहने की एक झोपड़ी में सुविधा, हर घर को अलग से रसोई घर, गुरुभगवंतों को घर घर से निर्दोष गोचरी की प्राप्ति व श्रावकों को गोचरी वहोराने का अनुपम लाभ, बच्चों व बुढो हेतु प्राचिन बैलगाड़ी , घी के दिये,लालटेनों, व मशालों से रोशनी ,प्राचिन वेषभूषा सभी के लिये अनिवार्य, प्राचिनता पर आधारित नगर की सजावट व बनावट, लुहार, कुंभार, सुथार, तैली, के भी घर जहाँ वो अपनी कला का करेंगे प्रदर्शन, प्राचिनता को दर्शाता विशाल प्रवेश द्वार, सुरक्षा हेतु घुडसवार|
परमात्मा के 9 विशेष रथ , सजे हूये 9 हाथी , 9 घोड़े , 9 ऊँट , इन्द्रध्वजा, 63 ऊँट गाडिय़ों ,27 प्राचिन सजी बैलगाड़ीयाँ, घोडागाडी, घोडाबग्गि से संघ की रहेंगी शोभा|
प्राचिन शहनाई वादक, राजस्थानी ढोल-थाली , घासाघोडी, राजस्थानी आंगी गैर नृत्य, उडीसा के शंखवादक, आदिवासी नृत्यकार, विविध रासँमंडलियाँ, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध तुतारी वादक, प्राचिन शैली की संगीत मंडली, प्राचिन नाटककार, आदि की रहेंगी विशेष रोनक |
श्री भिलडीयाजी तीर्थ (52 जिनालय) से श्री शंखेश्वर तीर्थ (52 जिनालय) के बीच कुल 9 पढाव ,इस रास्ते में कुल 108 में से 16 पार्श्वनाथ प्रभु के दर्शन का अनुपम लाभ, पाटण में पंचासरा – पार्श्वनाथ(52 जिनालय) सह 9 पार्श्वनाथ, व 100 मंदिरों के दर्शन का लाभ |
संघवी विमलचंद ए. वेदमुथ्था- – संस्थापक अध्यक्ष

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