घाणेराव : कस्बे में स्थित ऐतिहासिक चारभुजा तालाब में पिछले कई वर्षो रिसाव होने के कारण तालाब में पानी नही रूक पा रहा है। जबकि तालाब में हर वर्ष पानी की आवक अधिक होती है,ऐसे में रिसाव के कारण सर्दी के मौसम में ही यह तालाब पानी के अभाव में सुखने के कगार पहुंच गया है। ऐसे में यह तालाब किसानों के लिए नाकारा साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि कस्बे की चामुण्डा कॉलोनी से कुछ दुरी पर स्थित चारभुजा ढाणी के पास तालाब है जो चारभुजा तालाब के नाम प्रसिद्व है। क्योकि इस तालाब की दीवार पर भगवान चारभुजा का ऐतिहासिक मंदिर है।
मंदिर के पास प्राचीप बावडी है। इस तालाब में बरसात के मौसम में पानी की आवक अधिक होती है इलिए चार पॉच माह तक इसमें पानी बचा रहता है। जो पश्ुाओं और जंगली जानवरों के लिए यह तालाब बहुत ही उपयोगी है। साथ ही तालाब में पानी भरा रहने के कारण आसपास के किसानों के कुऐं भी रिचार्ज होते है। ऐसे में यह तालाब किसानों के लिए भी बहुत उपयोगी था। मगर तालाब में रिसाव होने के कारण पानी रिसाव के साथ बाहर निकल शुरू हो जाता है। जो करीब तीन से चार माह तक रिवास से पानी बाहर निकलता है।
जबकि तालाब की खुदाई पर मनरेगा योजना के तहत 2009-10 में 18 लाख की राशि खर्च की गई थी। मगर तालबा के रिसाव को रोकने के लिए कोई कार्य आज दिन तक नही किया गया। जबकि पिछले पॉच वर्षो से लगातार तालाब ओवरफलों हो रहा है। क्योकि तालाब में पानी की आवक अधिक होती है मगर रिसाव के कारण पानी तालाब में नही रूक पाता है। वर्तमान में भी रिसाव के कारण पानी तालाब से बाहर निकल चुका है। ऐसे में कुछ दिनों का पानी की ही तालाब में बचा है।
जबकि सर्दी को मौसम है इसी मौसम में यह तालाब पानी के अभाव में सुख जायेगा। ऐसे में यह तालाब नही तो किसानों के लिए और नही पशुओं वह जंगली जानवरों के लिएउपयोगी साबित हो रहा है। जबकि तालाब में पानी की आवक अधिक होने के बावजुद यह सर्दी के मौसम में सुखने कगार पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक तालाब को उपयोगी बनाना है तो उसका रिसाव रोकना होगा तभी जाकर इससे में पानी बच पायेगा।
लगातार पॉच वर्षो से हो रहा ओवरफलों
ऐतिहासिक चारभुजा तालाब में बरसात के पानी की आवक अधिक होने के कारण पिछले पॉच वर्षो से लगातार ओवरफलों हो रहा है। मगर तालाब मेें रिसाव होने के कारण पानी तालाब में नही रूक पा रहा है। जबकि पानी की आवक अधिक हो रही है।
तालाब के पास गोचर भूमि है मौजुद
चारभुजा तालाब पशुओं और जंगली जानवरो के लिए बडा ही उपयोगी है। क्योकि इस तालाब के पास ही गोचरभूमि मौजुद है। जिसमें बडी संख्या में जंगली जानवर विच्छर करते है। वही तालाब के पास ही पशुपालक रहते है। ऐसे में यह तालाब बहुत ही उपयोगी है।
मनरेगा के तहत 18 लाख की राशि हो चुकी खर्च
चारभुजा तालाब में रिसाव के कारण पानी नही रूक पा रहा है। मगर मनरेगा योजना के तहत इसी खुदाई पर 18 लाख की राशि खर्च की गई है। अगर इसी राशि में से कुछ राशि इसके रिसाव को रोकने के लिए खर्च की जाती तो यह तालाब आज पानी से लबालब भरा होता।
किसानों के कुऐं नही हो रहे रिचार्ज
चारभुजा तालाब में रिसाव होने के कारण पानी नही रूक पा रहा है जिसके कारण सर्दी के मौसम में ही यह तालाब सुख जाता है। ऐसे में पानी के अभाव में किसानों के कुऐं भी रिचार्ज नही हो रहे है। जिसके कारण यह तालाब किसानों के लिए नाकारा साबित हो रहा है।
तालाब का रिसाव रोकने पर होगा कार्य
ऐतिहासिक चारभुजा तालाब में रिसाव के कारण पानी नही रूक पा रहा है ऐसे यह तालाब जल्दी सुख जाता है। तालाब के रिसाव को रोकने के लिए मनरेगा योजना के तहत प्रस्ताव बनाकर राशि स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा। श्रीमती संतोष चन्द्रशेखर मेवाडा सरपंच घाणेराव

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