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जोधपुर। रेगिस्तान में बाढ़। भले ही कल्पना से भी परे हो लेकिन थार के रेगिस्तान में स्थित बाड़मेर के लोग बारह बरस पहले भीषण को झेल चुके है। अकाल की मार झेलने को अभिशप्त रेतीले और सूखे बाड़मेर के लोगों का पहली बार बाढ़ से सामना हुआ। रात के समय यकायक आए सैलाब में सौ लोग डूब गए। सबसे अधिक नुकसान कवास और मलवा गांव में हुआ। ये दोनों गांव पूरी तरह से डूब गए। यहां भरे बाढ़ के पानी को निकालने में कई माह लग गए। जिस क्षेत्र में न कोई नदीं-नाला हो और बड़े-बड़े रेतीले टीले हो वहां इससे पहले कभी बाढ़ तो शायद ही कभी आई।

ऐसे आई बाढ़: अगस्त 2006 में बाड़मेर व जैसलमेर जिलों में चार दिन से अच्छी बारिश हो रही थी और सभी के चेहरे खिले हुए थे। 21 अगस्त की रात यकायक कवास में पानी आना शुरू हो गया। तीन तरफ से रेतीले टीलों से घिरे कवास में आए पानी को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला और पानी का स्तर बढ़ता चला गया। घरों में पानी आने से चौंके लोग जान बचाकर अपने मवेशियों को साथ लेकर निकट के रेतीले टीलों पर चढ़ गए। कई लोगों को भागने तक का अवसर नहीं मिला।

चौंक उठे प्रशासनिक अधिकारी: देर रात किसी ने उपखंड अधिकारी को इसकी सूचना दी कि हम बाढ़ से घिर गए है और हमारी जान बचाई जाए। यह सुन वे चौंक उठे। उन्होंने जिला कलेक्टर सुबीर कुमार को इसकी जानकारी दी तो वे भी चौंक उठे। सर्किट ङाउस में ठहरे राज्य सरकार के एक मंत्रीं को तो इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ। किसी तरह दो साथियों के साथ उपखंड अधिकारी चुन्नीलाल सैनी मौके पर पहुंचे। हालात बहुत विकट थे, लोग मदद को चिल्ला रहे थे। भीषण बाढ़ में सीमित संसाधनों से वे किसी की मदद करने में असहाय थे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जायजा लेने क दौरान उनकी खुद की जिप्सी बह गई। बहती जिप्सी एक स्थान पर अटक गई। वहीं चालक ने एक पेड़ पर चढ़ अपनी जान बचाई। बाढ़ में फंसे इन दोनों को अगले दिन हेलीकॉप्टर की मदद से बचाया जा सका।

सौ लोग गंवा बैठे थे अपनी जान: कवास और मलवा मे आई बाढ़ में सौ लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। पानी में तैरते शव बाढ़ से हुए विनाश का कहानी बया कर रहे थे। इस बाढ़ के पश्चात प्रशासन ने नया कावस बसाया ताकि भविष्य में फिर कभी ऐसे हालात नहीं बने, लेकिन लोग फिर से अपने पुराने घरों में आकर आबाद हो गए। आज भी बाड़मेर में तेज बारिश शुरू होते ही प्रशास न सबसे पहले कवास में गांव खाली करने की मुनादी करवाता है। ये सुन गांव वाले आज भी सिहर उठते है।

इस कारण आई बाढ़: वर्ष 2006 के अगस्त माह के चार दिन में ही रेगिस्तानी बाड़मेर में 649 और जैसलमेर में 700 मिलीमीटर पानी बरसा। यकायक हुई इतनी बारिश से हर तरफ पानी ही पानी हो गया। सदियों पुराने नदी नाले एक बार फिर बह निकले। जैसलमेर में हुई तेज बारिश के कारण 21 अगस्त की रात वहां बने एनिकट पानी का दबाव नहीं झेल पाए और एक के बाद एक कर टूटने लगे। इससे पानी का दबाव बढ़ता रहा और यह पूरे वेग के साथ आगे बढ़ चला। तीन तरफ रेतीले धोरों से घिरे कवास में आकर पानी थम गया। उसके सामने करीब सौ मीटर ऊंचे रेतीले टीले खड़े थे। पानी को निकलने का रास्ता ही नहीं मिला और कटोरीनुमा कवास में करीब 22 फीट की ऊंचाई तक पानी भर गया। ऐसे ही हालात क्षेत्र के मलबा के रहे। यह गांव भी पूरी तरह से पानी में डूब गया।

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